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विजय दिवस पर शहीदों को नमन, वीर नारियों को सर्वोच्च सम्मान

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 डी पी रावत 

अखण्ड भारत दर्पण न्यूज 

शहीद स्मारक में 1971 युद्ध की स्मृति में 54वां विजय दिवस समारोह आयोजित

मंडी शहर के इंदिरा मार्केट स्थित शहीद स्मारक में मंगलवार को 1971 भारत–पाक युद्ध की ऐतिहासिक विजय की स्मृति में 54वां विजय दिवस समारोह श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया गया। जिला प्रशासन, सैनिक कल्याण विभाग, जिला पूर्व सैनिक लीग तथा डिफेंस वुमेन वेलफेयर एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस समारोह में अमर शहीदों को पुष्पचक्र अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई।



उपायुक्त अपूर्व देवगन, वीर नारियों, पूर्व सैन्य अधिकारियों, जवानों, प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय नागरिकों ने शहीद स्मारक पर पहुंचकर पुष्पचक्र अर्पित किए। इस अवसर पर दो मिनट का मौन रखकर 1971 युद्ध में देश के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले वीर सपूतों को स्मरण किया गया।


समारोह में उपायुक्त अपूर्व देवगन ने 1971 युद्ध में शहीद हुए सैनिकों की वीर नारियों—विशन देवी (पत्नी शहीद सिपाही जय सिंह), चिंता देवी (पत्नी शहीद सिपाही किशन चंद), निर्मला देवी (पत्नी शहीद नायक अमर सिंह), कृष्णा देवी (पत्नी शहीद सिपाही नरोत्तम राम), तुलसी देवी (पत्नी शहीद लांस नायक महंत राम), विमलकांत (पत्नी शहीद सिपाही कृष्ण चंद) और विमला कुमारी (पत्नी शहीद सिपाही खूब राम) को सम्मानित किया।



इस अवसर पर उपायुक्त ने कहा कि विजय दिवस जैसे आयोजनों में वीर नारियां ही मुख्य अतिथि होनी चाहिए, क्योंकि वास्तविक सर्वोच्च बलिदान उन्हीं परिवारों ने दिया है। इसी भावना को दर्शाते हुए उन्होंने स्वयं दूसरी पंक्ति में बैठकर यह संदेश दिया कि भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों में वीर नारियों को सर्वोच्च सम्मान मिलना चाहिए।


उन्होंने कहा कि आज देश जिस शांति, सुरक्षा और विकास के पथ पर अग्रसर है, वह सैनिकों और उनके परिवारों के त्याग व बलिदान का परिणाम है। 1971 के युद्ध में मंडी जिले के 21 जवान शहीद हुए थे। सैनिकों की बदौलत ही आज देशवासी निर्भय होकर स्वतंत्र जीवन जी पा रहे हैं।


जिला सैनिक कल्याण विभाग के उप निदेशक लेफ्टिनेंट कर्नल गोपाल गुलेरिया ने बताया कि 16 दिसंबर 1971 की ऐतिहासिक विजय को आज 54 वर्ष पूरे हो चुके हैं। यह युद्ध 3 से 16 दिसंबर 1971 तक चला और मात्र 14 दिनों में भारतीय सेना ने सुनियोजित रणनीति से निर्णायक विजय हासिल की। इसी दिन पूर्वी पाकिस्तान को आजादी मिली, जो आज बांग्लादेश के नाम से जाना जाता है। इस युद्ध में देश के 3845 सैनिक शहीद हुए, जिनमें हिमाचल प्रदेश के 190 और मंडी जिले के 21 जवान शामिल थे।


जिला पूर्व सैनिक लीग के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सेवानिवृत्त कैप्टन हेत राम शर्मा ने कहा कि छोटा राज्य होने के बावजूद हिमाचल प्रदेश को चार परमवीर चक्र मिलने का गौरव प्राप्त है। उन्होंने बताया कि मंडी जिले के सूबेदार कांशी राम को 1962 के युद्ध में महावीर चक्र से सम्मानित किया गया था, जो जिले के लिए गर्व की बात है।


समारोह में नगर निगम महापौर वीरेन्द्र भट्ट, एसडीएम मंडी सदर रूपिन्द्र कौर, आयुक्त नगर निगम रोहित राठौर, राज्य सैनिक कल्याण विभाग के निदेशक ब्रिगेडियर मदनशील शर्मा, कर्नल के.के. मल्होत्रा, कर्नल एम.के. मंडयाल, कर्नल भीम सिंह, कर्नल हरिश वैद्य, कर्नल प्रताप, कर्नल वीरेंद्र तपवाल, कर्नल जे.सी. सैनी, जिला पूर्व सैनिक लीग के अध्यक्ष कैप्टन कश्मीर सिंह, सचिव कैप्टन हेत राम शर्मा सहित बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक, प्रशासनिक अधिकारी और डिफेंस वुमेन वेलफेयर एसोसिएशन की अध्यक्ष आशा ठाकुर, सचिव सरिता गुलेरिया तथा अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

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