108–102 एंबुलेंस कर्मियों का दर्द: न्यूनतम वेतन, ओवरटाइम और सुरक्षा की मांग, सरकार से तुरंत हस्तक्षेप की गुहार - अखण्ड भारत दर्पण (ABD) न्यूज़

अखण्ड भारत दर्पण (ABD)  न्यूज़

ABD News पर पढ़ें राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय, प्रदेश और स्थानीय समाचार। राजनीति, शिक्षा, खेल और ताज़ा खबरें।


Breaking News

    Saturday, December 27, 2025

    108–102 एंबुलेंस कर्मियों का दर्द: न्यूनतम वेतन, ओवरटाइम और सुरक्षा की मांग, सरकार से तुरंत हस्तक्षेप की गुहार


    कुल्लू,27 दिसम्बर।

    अखण्ड भारत दर्पण (ABD)न्यूज़ 

    हिमाचल प्रदेश में 108 व 102 एंबुलेंस सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों ने एक बार फिर श्रम कानूनों के उल्लंघन और शोषण के गंभीर आरोप लगाए हैं। हिमाचल प्रदेश 108 व 102 एंबुलेंस कर्मचारी यूनियन (संबद्ध सीटू) ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।


    यूनियन का आरोप है कि एंबुलेंस सेवाएं संचालित करने वाली Medswan Foundation के तहत कार्यरत कर्मचारियों को सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम वेतन तक नहीं दिया जा रहा। कर्मचारियों से 12 घंटे से अधिक ड्यूटी करवाई जाती है, लेकिन ओवरटाइम का भुगतान नहीं किया जाता। इतना ही नहीं, नियमानुसार मिलने वाली छुट्टियों और अन्य श्रम सुविधाओं से भी कर्मियों को वंचित रखा जा रहा है।


    यूनियन ने बताया कि इस मामले में हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय, लेबर कोर्ट, सीजीआईटी शिमला और श्रम विभाग के आदेश भी आ चुके हैं, बावजूद इसके वर्षों से हालात जस के तस बने हुए हैं। जब कर्मचारी अपनी जायज मांगों को यूनियन के माध्यम से उठाते हैं तो उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है, कई बार तबादले या नौकरी से निकालने की धमकी दी जाती है।

    ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि Medswan Foundation से पहले कई कर्मचारी GVK EMRI के तहत सेवाएं दे चुके हैं। उस दौरान सेवा समाप्ति पर ग्रेच्युटी, नोटिस पे और अन्य देय लाभों का भुगतान नहीं किया गया, जो श्रम कानूनों का खुला उल्लंघन है।


    यूनियन की प्रमुख मांगों में सभी कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन, ओवरटाइम का भुगतान, ईपीएफ-ईएसआई में सुधार, सेवा की निरंतरता व वरिष्ठता का लाभ, हर वर्ष कम से कम 10 प्रतिशत वेतन वृद्धि और सभी श्रम कानूनों के सख्त पालन की मांग शामिल है।

    यूनियन ने सरकार से आग्रह किया है कि कर्मचारियों के संवैधानिक अधिकारों (अनुच्छेद 19 व 21) की रक्षा की जाए और मजदूर विरोधी नीतियों पर तत्काल रोक लगाई जाए।

    अब बड़ा सवाल यह है कि जनसेवा से जुड़ी एंबुलेंस सेवाओं में काम करने वाले कर्मियों की आवाज़ कब सुनी जाएगी और सरकार कब इन गंभीर आरोपों पर ठोस कार्रवाई करेगी।

    No comments:

    Post a Comment

    Thanks for contact us. We will contact you shortly.