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बंजार सराज में आगजनी की बढ़ती घटनाएं बनीं चिंता का विषय

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तीर्थन घाटी में डेढ़ माह में चार गांव आग की चपेट में


 परस राम भारती

अखण्ड भारत दर्पण न्यूज 

जिला कुल्लू के बंजार सराज क्षेत्र में लगातार हो रही आगजनी की घटनाओं ने ग्रामीणों और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। तीर्थन घाटी के गुशेनी क्षेत्र में बीते डेढ़ महीने के भीतर चार गांवों में आगजनी की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। हिमालय नीति अभियान के संयोजक गुमान सिंह ने इसे पहाड़ी गांवों के लिए गंभीर चेतावनी बताते हुए निर्माण और भंडारण नीति में बदलाव की आवश्यकता पर जोर दिया है।


जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत नोहंडा के झनियार गांव में दिन के समय लगी आग से 16 घर पूरी तरह जलकर राख हो गए थे। इसके बाद सरकार द्वारा प्रभावित परिवारों को प्रति घर सात से आठ लाख रुपये की राहत राशि देने की घोषणा की गई। कुछ ही दिनों बाद इसी पंचायत के डिंगचा क्षेत्र के शाई गांव में एक मकान आग की भेंट चढ़ गया। पिछले महीने बूढ़ी दिवाली के दिन नाहीं गांव में भी आगजनी की घटना हुई।

ताजा मामला शुक्रवार शाम का है, जब ग्राम पंचायत पेखड़ी के गांव पेखड़ी में आग लग गई। इस घटना में तीन खलह/छानके (घास भंडारण घर) पूरी तरह जल गए। संयोगवश गांव में शोक कार्यक्रम के चलते बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे, जिनकी तत्परता से आग को फैलने से रोक लिया गया। ग्रामीणों के सामूहिक प्रयास से 70–80 घरों वाले घनी आबादी के गांव को बड़ी क्षति से बचा लिया गया।

प्रारंभिक जांच में आग लगने का कारण खलह में रखी सूखी घास में किसी अज्ञात व्यक्ति की लापरवाही से लगी चिंगारी माना जा रहा है। इससे पहले झनियार और गत वर्ष तांदी गांव की आगजनी में भी यही कारण सामने आया था।

गुमान सिंह ने बताया कि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सर्दियों के लिए पशुओं की घास जमा करने की पुरानी परंपरा अब खतरा बनती जा रही है। जलवायु परिवर्तन के चलते बर्फबारी कम होने के बावजूद रिहायशी घरों के पास घास का भंडारण किया जा रहा है, जिससे आग की आशंका बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि सटे हुए मकान, लकड़ी से बने काठकुणी घर, बिजली की खराब वायरिंग, नशे की हालत में लापरवाही, जंगलों में आग और कचरा जलाना भी आग फैलने के बड़े कारण हैं।

हिमालय नीति अभियान ने सुझाव दिया है कि घास भंडारण के लिए खलह और छानकों को आबादी से दूर बनाया जाए, गांवों में नियोजित निर्माण हो, अग्निशमन सुविधाएं और पानी के भंडारण के साधन विकसित किए जाएं तथा ग्रामीणों को नियमित रूप से जागरूक किया जाए।

गुमान सिंह ने कहा कि ग्राम पंचायत और ग्राम सभा को स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप सख्त नियम बनाकर उन्हें लागू करना होगा, अन्यथा भविष्य में सराज क्षेत्र को और बड़ी आपदाओं का सामना करना पड़ सकता है।

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