डी पी रावत
अखण्ड भारत दर्पण न्यूज
शिमला, 26 दिसंबर 2025:
आईजीएमसी शिमला में कार्यरत वरिष्ठ रेज़िडेंट डॉक्टर डॉ. राघव नरूला की सेवाएं समाप्त किए जाने के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। हिमाचल प्रदेश संयुक्त कर्मचारी महासंघ इस मामले में खुलकर डॉक्टर के समर्थन में सामने आ गया है।
संयुक्त कर्मचारी महासंघ ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को एक औपचारिक पत्र लिखकर डॉ. राघव नरूला की सेवा समाप्ति को वापस लेने की मांग की है। महासंघ ने इस कार्रवाई को जल्दबाजी में लिया गया निर्णय बताते हुए इसे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन करार दिया है।
महासंघ का कहना है कि डॉ. नरूला की सेवाएं बिना किसी विभागीय जांच, बिना चार्जशीट जारी किए और बिना सुनवाई का अवसर दिए समाप्त कर दी गईं, जबकि सीसीएस (सीसीए) नियम 1965 के तहत सेवा समाप्ति एक बड़ी सजा है, जिसे केवल नियमित विभागीय जांच के बाद ही दिया जा सकता है।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि कथित घटना दुर्भाग्यपूर्ण थी और महासंघ किसी भी प्रकार की बदसलूकी या टकराव का समर्थन नहीं करता, लेकिन लगाए गए आरोपों की तुलना में दी गई सजा अत्यधिक और असंगत है।
संयुक्त कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान और महासचिव हीरा लाल वर्मा ने मांग की है कि राज्यहित में इस निर्णय की समीक्षा की जाए और डॉ. राघव नरूला की सेवाएं बहाल की जाएं, ताकि डॉक्टरों और मरीजों के बीच विश्वास का संबंध बना रहे।
इस मामले के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग और सरकार की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। अब देखना होगा कि सरकार संयुक्त कर्मचारी महासंघ की मांग पर क्या रुख अपनाती है।
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