डी पी रावत
अखण्ड भारत दर्पण न्यूज
मोदी सरकार द्वारा मजदूरों के हितों की रक्षा के लिए बनाए गए 29 श्रम कानूनों को समाप्त कर उन्हें चार श्रम संहिताओं में बदलने तथा मनरेगा कानून में किए गए बदलाव के विरोध में सीटू आनी (जिला कुल्लू) ने शुक्रवार को आनी एसडीएम कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया।
सीटू जिला सचिव एवं आनी संयोजक पदम प्रभाकर ने कहा कि नई श्रम संहिताएं मजदूर विरोधी हैं, जिनका उद्देश्य उद्योगपतियों, कंपनियों और ठेकेदारों को लाभ पहुंचाना है। संगठन का आरोप है कि इन संहिताओं के माध्यम से कार्यदिवस को आठ घंटे से बढ़ाकर बारह घंटे करने का प्रावधान किया गया है, जिससे मजदूरों का शोषण बढ़ेगा।
उन्होंने कहा कि स्थायी रोजगार की व्यवस्था को कमजोर कर निश्चित अवधि के रोजगार को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे रोजगार की सुरक्षा समाप्त हो रही है। महिलाओं से रात्रि में कार्य करवाने, मजदूरों के संगठित होने और हड़ताल करने के अधिकारों को सीमित किए जाने को भी संगठन ने गंभीर चिंता का विषय बताया।
प्रदर्शन के दौरान मनरेगा कानून को समाप्त कर नई योजना में बदलने के फैसले का भी कड़ा विरोध किया गया। सीटू का कहना है कि मनरेगा देश के करोड़ों ग्रामीण मजदूरों, विशेषकर महिलाओं, के लिए आजीविका का महत्वपूर्ण सहारा है।
प्रदर्शन को सीटू जिला सचिव एवं आनी संयोजक पदम प्रभाकर ने संबोधित किया। उन्होंने कहा कि इन मजदूर विरोधी फैसलों के खिलाफ संगठन चरणबद्ध तरीके से निर्णायक आंदोलन करेगा। प्रदर्शन में करीब 60 से अधिक मजदूरों ने भाग लिया।
