[18/12, 16:54] ABD जिला ब्यूरो Bhushan Gurung: चंबा /- हिमाचल प्रदेश के जिला चंबा में झोपड़ी में कांपते मासूम, फटी छत से टपकती ठंड और आंखों में बेबसी, जब इन खामोश चीखों का वीडियो इंटरनेट मीडिया पर वायरल हुआ तब प्रशासन की नींद टूटी। चंबा जिले की भजोत्रा पंचायत के गांव मटवाड़ में बेसहारा बच्चों की यह दास्तां केवल एक परिवार की पीड़ा नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर सवाल बन गई, जो इन मासूमों के दर्द को अनदेखा करती रही।
पिता की मृत्यु के बाद मां ने कर ली दूसरी शादी
पिता की मृत्यु और मां के घर छोड़कर चले जाने के बाद चार बच्चे बेसहारा हो चुके थे। बताया जा रहा है कि बच्चों की मां ने दूसरी शादी कर ली। न खाने के लिए भरपेट भोजन, न पहनने के लिए गर्म कपड़े और न सिर छिपाने के लिए पक्का मकान। सर्द मौसम में झोपड़ीनुमा मकान में ठिठुरते ये बच्चे हर रात जिंदगी से जूझते रहे।
गांव, पंचायत और संबंधित विभागों की नजरें कभी इन पर नहीं पड़ीं। हालात तब बदले, जब किसी संवेदनशील व्यक्ति ने बच्चों की दुर्दशा को वीडियो इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित किया। वीडियो प्रसारित होते ही प्रशासन हरकत में आया।
जिला बाल कल्याण समिति के सदस्य मौके पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया। समिति ने बेसहारा बच्चों को सुख आश्रय योजना के अंतर्गत लाकर संरक्षण प्रदान किया। अब इन बच्चों को सुरक्षित आश्रय, भोजन, शिक्षा और देखभाल की व्यवस्था उपलब्ध करवाई जा रही है।
पंचायत सचिव चमन शर्मा ने बताया कि बच्चों के पिता के नाम पर पहले से आवास स्वीकृत था लेकिन उनके निधन के समय बच्चे नाबालिग थे। नाबालिग होने के कारण नियमों के तहत उनके नाम पर मकान का निर्माण नहीं हो सका। इसी वजह से आज भी इन बच्चों का मकान कच्चा है और वे पक्के आवास से वंचित हैं।
मटवाड़ निवासी जगीर सिंह के निधन के बाद उनके पीछे उनकी पत्नी व चार बच्चे रहे थे। इनमें बेटी निशा देवी (17 वर्ष), संतोष कुमार (15 वर्ष), मीना देवी (11 वर्ष) और अर्जुन (8 वर्ष) शामिल हैं। पिता की मौत के बाद इन बच्चों की मां भी चारों बच्चों को बेसहारा छोड़कर
घर से चली गई।
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