डी पी रावत
अखण्ड भारत दर्पण न्यूज
शिमला |
जिला शिमला में सड़कों पर घूम रहे बेसहारा पशुओं की समस्या के स्थायी समाधान के लिए जिला प्रशासन ने ठोस कदम उठाया है। उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप ने प्रत्येक उपमंडल स्तर पर समिति गठन को लेकर अधिसूचना जारी कर दी है। इस विशेष अभियान के तहत जनवरी 2026 तक पूरे जिला शिमला को बेसहारा पशु मुक्त बनाया जाएगा।
अधिसूचना के अनुसार, प्रत्येक उपमंडल में गठित समिति की अध्यक्षता एसडीएम करेंगे। समिति में लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता, खंड विकास अधिकारी, थाना प्रभारी, नगर निकाय/पंचायत प्रतिनिधि, स्थानीय गौशाला या पशु आश्रय प्रतिनिधि सदस्य होंगे, जबकि वरिष्ठ पशु चिकित्सक को सदस्य सचिव नियुक्त किया गया है।
यह समिति 15 दिनों के भीतर उपमंडल क्षेत्र से बेसहारा पशुओं को एकत्र कर नजदीकी गौशालाओं में पहुंचाएगी तथा 15 दिन बाद इसकी रिपोर्ट उपायुक्त को प्रस्तुत करेगी। इसके लिए 15 दिवसीय विशेष अभियान चलाया जाएगा।
उपायुक्त ने बताया कि हालिया सर्वेक्षण में जिले भर में 272 बेसहारा पशु चिन्हित किए गए हैं। जिले की गौशालाओं में लगभग 3500 पशुओं की क्षमता उपलब्ध है, जिनमें फिलहाल करीब 2500 पशु रखे गए हैं। सभी चिन्हित पशुओं को क्षमता अनुसार नजदीकी गौ सदनों में स्थानांतरित किया जाएगा।
उन्होंने पशु मालिकों से अपील की कि वे अपने पशुओं को बेसहारा न छोड़ें, क्योंकि सर्दियों में इनकी जान को खतरा रहता है और सड़क दुर्घटनाओं की आशंका भी बढ़ जाती है।
प्रमुख स्थान जहां बेसहारा पशु चिन्हित किए गए
टूटू चौक, तारा देवी हाईवे, खलीनी, ज्यूरी, रामपुर, झाकड़ी, कुमारसैन, कोटगढ़, ठियोग, नारकंडा, कोटखाई, चौपाल, नेरवा, रोहड़ू, चिड़गांव और जुब्बल सहित कई क्षेत्र।
