बार-बार टालमटोल स्वीकार नहीं, बिजली विभाग जनता की समस्याएं तुरंत हल करे : पदम प्रभाकर - अखण्ड भारत दर्पण (ABD) न्यूज़

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    Tuesday, December 16, 2025

    बार-बार टालमटोल स्वीकार नहीं, बिजली विभाग जनता की समस्याएं तुरंत हल करे : पदम प्रभाकर

     डी पी रावत 

     अखण्ड भारत दर्पण न्यूज 

    आनी।

    बिजली विभाग आनी मंडल द्वारा आम जनता की समस्याओं को लगातार टालने पर सीपीआई(एम) ने कड़ा रोष जताया है। सीपीआई(एम) ब्रांच सचिव एवं लोकल कमेटी सदस्य आनी पदम प्रभाकर ने कहा कि अधिशासी अभियंता पी.सी. हार्नोट द्वारा हर बार टालमटोल की नीति अब स्वीकार नहीं की जाएगी।



    उन्होंने कहा कि आनी क्षेत्र में बिजली विभाग से जुड़े छोटे-छोटे कार्यों के लिए भी लोगों को बार-बार विभाग के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। आम जनता उम्मीद लेकर विभाग के पास जाती है, लेकिन हर बार उन्हें निराशा ही हाथ लगती है। अधिशासी अभियंता द्वारा यह कहना कि डिवीजन के पास न तो तार उपलब्ध हैं और न ही खंभे, बेहद चिंताजनक है। जब आवश्यक संसाधन ही उपलब्ध नहीं हैं तो डिवीजन बनाए रखने का औचित्य क्या है, यह एक बड़ा सवाल है।



    पदम प्रभाकर ने बताया कि अभी भी कई ऐसे परिवार हैं जिनकी आपदा के दौरान बिजली लाइनें टूट गई थीं, लेकिन महीनों बीत जाने के बावजूद उनकी मरम्मत नहीं की गई। तारों को दुरुस्त करना, जर्जर पोल बदलना और नियमित व सुरक्षित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना विभाग की जिम्मेदारी है, लेकिन इन सभी मोर्चों पर विभाग विफल नजर आ रहा है।


    उन्होंने विशेष रूप से लढागी क्षेत्र के ग्रामीणों की समस्याओं का उल्लेख करते हुए कहा कि केवल नोटिस जारी कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ना उचित नहीं है। बुच्छैर क्षेत्र में भी बिजली से जुड़ी अनेक समस्याएं लंबे समय से लंबित हैं। यदि इन समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो सीपीआई(एम) ब्रांच बुच्छैर को आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।


    पदम प्रभाकर ने कहा कि अधिकारी जनता के टैक्स के पैसे से लाखों रुपये वेतन लेते हैं और उन्हें जनता की सेवा के लिए नियुक्त किया गया है। जो अधिकारी अपनी जिम्मेदारी निभाने में असमर्थ हैं, उन्हें या तो अपना कार्य सुधारना चाहिए या फिर पद छोड़ देना चाहिए।


    उन्होंने स्पष्ट किया कि यह लड़ाई किसी व्यक्तिगत स्वार्थ की नहीं, बल्कि जनहित और आम जनता की पीड़ा को लेकर है, और जब तक समस्याओं का समाधान नहीं होता, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।

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