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लोक संस्कृति और साहित्य के संरक्षण में योगदान के लिए वरिष्ठ साहित्यकार दीपक शर्मा गणतंत्र दिवस पर सम्मानित

 


इतिहास साक्षी है कि सामाजिक चेतना, राष्ट्रीय जागरण और स्वतंत्रता आंदोलन में देश के साहित्यकारों, कवियों और लेखकों का अमूल्य योगदान रहा है। लोक साहित्य और लोक काव्य के माध्यम से विभिन्न प्रांतों में समाज के भीतर क्रांतिकारी चेतना का संचार किया गया। हिमाचल प्रदेश में भी इस परंपरा के अनेक उदाहरण मिलते हैं, जिनमें पहाड़ी बाबा काशीराम, लालचंद प्रार्थी, चंद्रधर शर्मा गुलेरी, डॉ. वाई.एस. परमार तथा पुरोहित चंद्रशेखर बेबस जैसे साहित्यकारों का नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय है।

राष्ट्रीय पर्वों के अवसर पर संस्कृति एवं साहित्य के क्षेत्र में कार्य करने वाले व्यक्तित्वों को सम्मानित करने की इस परंपरा को निरमंड के उपमंडल दंडाधिकारी मनमोहन सिंह ने गणतंत्र दिवस 2026 से प्रारंभ किया। इस पहल का क्षेत्र के बुद्धिजीवियों एवं साहित्यप्रेमियों ने स्वागत किया है।

इसी कड़ी में गणतंत्र दिवस के अवसर पर निरमंड के वरिष्ठ साहित्यकार एवं इतिहासकार दीपक शर्मा को उनके उत्कृष्ट लेखन तथा लोक-सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया। उपमंडल दंडाधिकारी मनमोहन सिंह ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया।

गौरतलब है कि दीपक शर्मा को समय-समय पर साहित्य एवं संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए विभिन्न मंचों द्वारा सम्मानित किया जाता रहा है। वर्ष 1996 में तत्कालीन जिलाधीश कुल्लू द्वारा उन्हें साक्षरता मित्र के रूप में सम्मानित किया गया। वर्ष 2004-05 में सांस्कृतिक एवं साहित्यिक संघ आनी, जिला कुल्लू द्वारा ‘हम संस्कृति पुरस्कार’ प्रदान किया गया। हिमतरु प्रकाशन कुल्लू द्वारा उन्हें हिमतरु सम्मान 2007 से नवाजा गया।

इसके अतिरिक्त वर्ष 2016 में सीमा कॉलेज रोहड़ू में आयोजित राज्य स्तरीय संगोष्ठी में पांडुलिपियों के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया। भुट्टी विवर्ज कोऑपरेटिव सोसाइटी द्वारा उन्हें वर्ष 2018-19 में ‘पुरोहित चंद्रशेखर बेबस लोक साहित्य राष्ट्रीय पुरस्कार’ से अलंकृत किया गया। बुड्ढी दिवाली निरमंड 2025 के अवसर पर लोक निर्माण विभाग मंत्री विक्रमादित्य सिंह द्वारा लोक संस्कृति संरक्षण हेतु सम्मानित किया गया।

हाल ही में 19 जनवरी 2026 को सर्वपल्ली राधाकृष्णन कॉलेज नोगली, रामपुर बुशहर में आयोजित समारोह में माननीय राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल द्वारा उन्हें ‘अवार्ड ऑफ एक्सीलेंस’ से विभूषित किया गया।

साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में इस प्रकार की सम्मान परंपरा को क्षेत्र के लिए प्रेरणादायी कदम माना जा रहा है।

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