बंजार (परस राम भारती)।
अखण्ड भारत दर्पण न्यूज
जिला कुल्लू स्थित ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क (जीएचएनपी) मुख्यालय शमशी में जैव विविधता पर्यटन एवं सामुदायिक उन्नयन संस्था (बीटीसीए) की गवर्निंग बॉडी और स्थानीय हितधारकों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक का उद्देश्य पार्क प्रबंधन के साथ समन्वय मजबूत करना, संस्था की कार्यप्रणाली की समीक्षा करना और भविष्य की दिशा तय करना रहा।
बैठक में ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क के मुख्य वन संरक्षक (सीएफ) संदीप शर्मा, डीएफओ सचिन शर्मा, एसीएफ हंसराज ठाकुर और वन परिक्षेत्र अधिकारी विक्रम सिंह विशेष रूप से उपस्थित रहे। बीटीसीए संस्था की ओर से गवर्निंग बॉडी सदस्य केबल कृष्ण, लाल चंद राठौर, आदित्य सूद पंकी, तिलक शर्मा, कमला शर्मा सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे। वहीं स्थानीय हितधारकों में ग्राम पंचायत पेखड़ी के उपप्रधान वीरेंद्र भारद्वाज, किशोरी लाल, राम सिंह, डोला सिंह, लाल सिंह, हेम राज, पूर्ण चंद और भुवन्त सहित कई लोग बैठक में शामिल हुए।
बैठक की शुरुआत सभी सदस्यों के परिचय सत्र से हुई। इसके बाद बीटीसीए संस्था की कार्यप्रणाली और अब तक किए गए कार्यों की विस्तृत जानकारी दी गई। संस्था के सचिव लाल चंद राठौर ने बताया कि बीटीसीए एक समुदाय आधारित गैर-सरकारी संस्था है, जो जैव विविधता संरक्षण, समुदाय आधारित पर्यटन, महिला सशक्तिकरण और वैकल्पिक आजीविका को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पार्क के इकोजोन क्षेत्र में कार्य कर रही है। उन्होंने संस्था की उपलब्धियों पर भी प्रकाश डाला।
बैठक में बीटीसीए की कार्यकारिणी एवं गवर्निंग बॉडी के पुनर्गठन को लेकर भी विस्तार से चर्चा हुई। संस्था के पदाधिकारियों ने बताया कि इस संबंध में शीघ्र ही प्रभावित पंचायतों की सहभागिता से आम सभा (जनरल हाउस मीटिंग) बुलाई जाएगी, जिसमें संस्था के भविष्य, संगठनात्मक ढांचे और आवश्यक निर्णयों पर सहमति बनाई जाएगी।
पार्क प्रबंधन की ओर से सीएफ संदीप शर्मा ने कहा कि स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी से ही संरक्षण और विकास के लक्ष्यों को सफलतापूर्वक प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि बीटीसीए जैसी संस्थाएं इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं और पार्क प्रबंधन की ओर से संस्था व स्थानीय हितधारकों को पूरा सहयोग मिलता रहेगा।
स्थानीय लोगों ने कहा कि यह बैठक पार्क प्रबंधन, बीटीसीए संस्था और स्थानीय समुदायों के बीच आपसी सहयोग और विश्वास को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई है, जिससे आने वाले समय में संरक्षण और आजीविका से जुड़े कार्यों को और अधिक प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया जा सकेगा।
