विवाह का भरोसा देकर दुष्कर्म के आरोपों से जुड़े एक मामले में जिला न्यायालय ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए आरोपी को सशर्त जमानत प्रदान की है। अदालत ने कहा कि यदि दोनों पक्ष बालिग हों और उनके बीच लंबे समय तक संबंध रहे हों, तो केवल विवाह न होने के आधार पर प्रारंभिक स्तर पर ऐसे मामले को दुष्कर्म की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।
जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान विशेष न्यायाधीश ने रिकॉर्ड का हवाला देते हुए बताया कि शिकायतकर्ता और आरोपी के बीच लगभग दस वर्षों तक संबंध रहे। अदालत के अनुसार, मौजूदा तथ्यों से यह मामला सहमति से बने संबंधों का प्रतीत होता है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अब तक की जांच में ऐसा कोई ठोस साक्ष्य सामने नहीं आया है, जिससे यह सिद्ध हो कि संबंध धोखाधड़ी, दबाव अथवा किसी प्रकार के प्रलोभन के तहत बनाए गए थे।
यह मामला 26 अक्तूबर 2025 को माजरा थाना में दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि पांवटा साहिब निवासी खेम सिंह ने विवाह का आश्वासन देकर लंबे समय तक उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए और बाद में शादी से इनकार कर दिया। शिकायत में यह भी कहा गया था कि इस घटना से उसका आत्मसम्मान आहत हुआ और वह मानसिक रूप से प्रभावित हुई।
अदालत ने आदेश में कहा कि वर्तमान चरण में केवल विवाह न होने के आधार पर इस प्रकरण को दुष्कर्म की श्रेणी में रखना न्यायसंगत नहीं माना जा सकता। इन्हीं तथ्यों को ध्यान में रखते हुए आरोपी को सशर्त जमानत प्रदान की गई।
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