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शहर में बाल भिक्षा रोकने और इसमें शामिल बच्चों के पुनर्वास पर दिया गया जोर।

अखण्ड भारत दर्पण (ABD) न्यूज पंजाब/जालंधर (कमल जीत शीमार ऑनलाइन डेस्क ब्यूरो (ABD) न्यूज) : बीते दिनों डिप्टी कमिश्नर डा. हिमांशु अग्रवाल द्वारा जिला प्रशासकीय परिसर में प्रोजैक्ट जीवनजोत 2.0 की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा गया कि बाल भिक्षा मांगना केवल कानूनी मुद्दा नहीं है, बल्कि सामाजिक और मानवीय दृष्टि से भी गंभीर चुनौती है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कहा कि इस समस्या के समाधान के लिए बाल भिक्षा में शामिल व्यक्तियों पर सख्त कार्रवाई करने के साथ-साथ बाल भिक्षा में शामिल बच्चों की पहचान कर उनकी सुरक्षा, उचित देखभाल , काउंसलिंग और पढ़ाई के लिए ठोस उपाय सुनिश्चित किए जाएं, ताकि उन्हें अच्छा भविष्य दिया जा सके डिप्टी कमिश्नर डा. हिमांशु अग्रवाल द्वारा ऐसे बच्चों के माता-पिता के पुनर्वास पर भी जोर दिया गया। 
उन्होंने कहा कि माता-पिता को कौशल प्रशिक्षण आदि उपलब्ध करवाया जाए, ताकि उनके लिए रोजगार का रास्ता साफ हो सके और वह अपनी आर्थिक स्थिति सुधार सकें तथा बच्चों को भिक्षा मांगने ओर धकेलने की मजबूरी खत्म हो सके। उनके द्वारा शहर में इलाका अनुसार चेकिंग अभियान चलाने और इसे लगातार जारी रखने के निर्देश दिए , ताकि शहर को बाल भिक्षा से पूरी तरह मुक्त किया जा सके। 
उन्होंने कहा कि बाल भिक्षा को रोकने संबंधी अभियान में एन.जी.ओ. को भी शामिल किया जाए, जो इस अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते है। उन्होंने संदिग्ध मामलों में डी.एन.ए. टेस्ट करवाने का निर्देश भी दिया गया, ताकि बच्चों की पहचान और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। डिप्टी कमिश्नर डा. हिमांशु अग्रवाल द्वारा बताया कि जुवेनाइल जस्टिस एक्ट, 2015 की धारा 76 के अनुसार बच्चों को भिक्षा में उपयोग करने वालों को सख्त सजा हो सकती है। उन्होंने बताया कि किसी व्यक्ति द्वारा बच्चे को भिक्षा में उपयोग करने पर पांच साल तक की सजा और एक लाख रुपये का जुमार्ना हो सकता है। यदि किसी व्यक्ति द्वारा बच्चे को भिक्षा मांगने में उपयोग के लिए उसके अंग काटे जाते है तो उस व्यक्ति को सात से दस साल तक की सजा और पांच लाख रुपये का जुमार्ना हो सकता है। डिप्टी कमिश्नर डा. हिमांशु अग्रवाल द्वारा कहा गया कि बाल भिक्षा रोकने के लिए सामाजिक जागरूकता बहुत जरूरी है। 
डिप्टी कमिश्नर डा. हिमांशु अग्रवाल द्वारा अधिकारियों को इस संबंध में रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और अन्य प्रमुख स्थानों पर जागरूकता फ्लेक्स और बैनर लगाने के निर्देश दिए गए। उन्होंने अपील की कि बाल भिक्षा में फंसे बच्चे या उनके माता-पिता को मदद के लिए चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 पर संपर्क कर सकते है या व्हाट्सएप नंबर 9646222555 पर मैसेज भेजा जा सकता है। उन्होंने यह भी अपील की कि यदि किसी को बाल भिक्षा या किसी भी मुसीबत में फंसे बच्चे के बारे में जानकारी मिलती है, तो वह भी इन नंबरों पर सूचना दे सकते है। डिप्टी कमिश्नर डा. हिमांशु अग्रवाल द्वारा पुलिस विभाग को बाल भिक्षा रोकू टास्क फोर्स को छापेमारी के दौरान और रेस्क्यू किए गए बच्चों को आवश्यक प्रक्रिया पूर्ण करने के उपरांत उनको अपने संबंधित राज्यों में भेजने के लिए मौके पर आवश्यक पुलिस सहायता उपलब्ध करवाने के निर्देश भी दिए गए।

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