निरमण्ड | 3 फ़रवरी
✍️ डी.पी. रावत
अखण्ड भारत दर्पण (ABD) न्यूज़ ।
हिमाचल प्रदेश के जिला कुल्लू के विकास खण्ड निरमण्ड की ग्राम पंचायत नोर में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत सामने आए दस्तावेज़ों ने विश्वकर्मा योजना और मनरेगा में संभावित अनियमितताओं की ओर इशारा किया है।
🔍 काग़ज़ों में प्रशिक्षण, ज़मीन पर सवाल
RTI से प्राप्त जानकारी के अनुसार, विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत जिन प्रशिक्षण कार्यक्रमों को पूर्ण दर्शाया गया, उन्हीं अवधि में चार प्रशिक्षुओं की उपस्थिति व्यक्तिगत मनरेगा कार्यों के मस्टर रोल में दर्ज पाई गई।
इससे यह संदेह गहराता है कि प्रशिक्षण वास्तविक रूप से हुआ या केवल काग़ज़ों तक सीमित रहा।
💰 दो योजनाओं में भुगतान — सरकारी धन का दुरुपयोग?
दस्तावेज़ बताते हैं कि इन चारों प्रशिक्षुओं को विश्वकर्मा योजना प्रशिक्षण और मनरेगा कार्यों—दोनों में भुगतान दर्ज किया गया। इसे सरकारी धन के दुरुपयोग और वास्तविक लाभार्थियों के अधिकारों के हनन के रूप में देखा जा रहा है।
⚠️ परिवारवाद और हितों के टकराव के आरोप
शलाट गांव निवासी RTI एक्टिविस्ट हीरा लाल ने आरोप लगाया है कि पंचायत के निर्णयों और योजनाओं के लाभ में एक ही परिवार से जुड़े लोगों का प्रभाव रहा, जिससे हितों के टकराव की स्थिति बनी।
इसके साथ ही RTI आवेदनों पर अधूरी जानकारी देने और जांच को केवल फाइलों तक सीमित रखने के आरोप भी सामने आए हैं।
❓ स्वतंत्र जांच क्यों नहीं?
RTI खुलासों के बाद भी अब तक स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच न होने पर सवाल उठ रहे हैं।
मांग की जा रही है कि मनरेगा, विश्वकर्मा योजना सहित सभी विकास कार्यों की उच्चस्तरीय जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी या विजिलेंस से करवाई जाए, ताकि दोषियों पर कार्रवाई हो और पंचायत व्यवस्था में जनता का भरोसा बहाल हो।
🗣️ पूर्व प्रधान का पक्ष
इन आरोपों पर पूर्व प्रधान कांहन चन्द ने सफ़ाई देते हुए कहा—
“विश्वकर्मा योजना प्रशिक्षण में पात्र व्यक्तियों की हाज़री लगी है। मनरेगा के मस्टर रोल व्यक्तिगत कार्यों के लिए जारी हुए हैं, जिनकी हाज़री की जिम्मेदारी संबंधित व्यक्तियों की है। पंचायत और प्रधान पर लगे आरोप निराधार हैं, जिनका मैं खण्डन करता हूं।”
📌 अब बड़ा सवाल यही है—
क्या पंचायत नोर में योजनाएं सही मायनों में ज़मीन पर उतरीं या विकास केवल काग़ज़ों में सिमट कर रह गया?
जवाब निष्पक्ष जांच से ही मिलेगा।
