आनी | 4 फरवरी |
डी०पी० रावत।
अखण्ड भारत दर्पण (ABD) न्यूज़।
बिजली के निजीकरण और आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ डालने वाले बिजली संशोधन बिल विधेयक 2025-26 के खिलाफ हिमाचल प्रदेश के आनी में ज़बरदस्त एकजुटता देखने को मिली।
हिमाचल प्रदेश स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड एम्प्लॉयज यूनियन, पेंशनर्स फोरम तथा इंजीनियर एसोसिएशन की एक संयुक्त बैठक मंगलवार को बिजली बोर्ड डिविजनल कार्यालय आनी के परिसर में भोजन अवकाश के दौरान आयोजित की गई।
बैठक में ज्वाइंट एक्शन कमेटी (JAC) के आह्वान पर 12 फरवरी 2026 को प्रस्तावित देशव्यापी पेन डाउन व टूल डाउन हड़ताल और धरना-प्रदर्शन को सफल बनाने के लिए विस्तृत रणनीति बनाई गई।
✊ “यह लड़ाई वेतन की नहीं, अस्तित्व की है”
बैठक को संबोधित करते हुए राज्य उपाध्यक्ष झावे राम शर्मा ने कहा कि केंद्र सरकार पूंजीपतियों के दबाव में सरकारी विभागों, बोर्डों और सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण की राह पर चल रही है।
उन्होंने चेताया कि यदि यह बिजली संशोधन बिल पारित हुआ तो कर्मचारियों, पेंशनर्स और आम उपभोक्ताओं को इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
💡 स्मार्ट मीटरिंग पर बड़ा सवाल
बैठक में प्री-पेड स्मार्ट मीटर योजना के दुष्प्रभावों पर भी तीखी चर्चा हुई।
बताया गया कि जहां पुराने मीटर की कीमत मात्र ₹496 थी, वहीं स्मार्ट मीटर की लागत लगभग ₹10,000 है, जिसे अगले 10 वर्षों तक हर महीने ₹100 के रूप में उपभोक्ताओं से वसूला जाएगा।
साथ ही प्री-पेड सिस्टम में बैलेंस खत्म होते ही बिजली कटने की आशंका से गरीब और मध्यम वर्ग पर अतिरिक्त संकट खड़ा हो जाएगा।
👥 पेंशनर्स और नारी शक्ति की मज़बूत भागीदारी
पेंशनर्स यूनियन के अध्यक्ष नवल ठाकुर,रघुबीर भारती और तरुण शर्मा ने एक स्वर में कहा कि यह लड़ाई सिर्फ कर्मचारियों की नहीं, बल्कि हर उपभोक्ता की है, और इसे सभी विभागों को मिलकर लड़ना होगा।
बैठक में आनी इकाई की नारी शक्ति — निर्मला ठाकुर, आरती शाह, रचना ठाकुर और कुमारी ट्विंकल — की सक्रिय भागीदारी ने आंदोलन को और मज़बूती दी।
🗓️ 12 फरवरी को राष्ट्रव्यापी आंदोलन
NCCOEEE और EEFI के आह्वान पर देशभर में 12 फरवरी को होने वाली हड़ताल के तहत हिमाचल प्रदेश बिजली बोर्ड के अभियंता, कर्मचारी और पेंशनर्स आवश्यक सेवाओं को छोड़कर कार्यालयों के बाहर धरना-प्रदर्शन करेंगे।
📣 आम उपभोक्ताओं से अपील
बैठक के अंत में सर्वसम्मति से इस निजीकरण-हितैषी बिजली संशोधन बिल 2025-26 की कड़ी भर्त्सना की गई और आम जनता से अपील की गई कि वे आगे आकर इस जनविरोधी कानून को संसद में पारित होने से रोकने के लिए आवाज़ बुलंद करें।






