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    Monday, February 9, 2026

    ⚡ “बिजली नहीं, रोज़गार काटेगा संशोधन बिल?”

     बिजली अधिनियम नियम 2003 (संशोधन बिल-2025) से कांपा हिमाचल — आउटसोर्स कर्मियों की छंटनी पर गहरी चिंता।

    9 फ़रवरी,कुल्लू |

    डी० पी० रावत।

     अखण्ड भारत दर्पण (ABD) न्यूज़।


    प्रस्तावित बिजली अधिनियम नियम 2003 (संशोधन बिल-2025) ने हिमाचल प्रदेश के हज़ारों बिजली कर्मियों की नींद उड़ा दी है। ज़िला बिजली बोर्ड आउटसोर्स कर्मचारी यूनियन, कुल्लू के अध्यक्ष रविंद्र ठाकुर ने इस संशोधन को “रोज़गार विरोधी और निजीकरण को खुला निमंत्रण” बताते हुए गहरी चिंता जताई है।


    रविंद्र ठाकुर का कहना है कि यह संशोधन तकनीकी सुधार नहीं, बल्कि सामाजिक अन्याय का दस्तावेज़ बनता जा रहा है। उन्होंने चेताया कि यदि यह बिल मौजूदा स्वरूप में लागू हुआ, तो सबसे पहले आउटसोर्स कर्मचारियों की छंटनी होगी — वही कर्मचारी जो बर्फ़, बारिश, आपदा और अंधेरे में भी बिजली व्यवस्था को ज़िंदा रखते हैं।

    🔥 “बिजली बचेगी, कर्मचारी कटेंगे?” — रविंद्र ठाकुर का सीधा सवाल

    यूनियन अध्यक्ष के अनुसार—

    “संशोधन बिल में आउटसोर्स, संविदा और तकनीकी कर्मचारियों के भविष्य को लेकर एक भी सुरक्षा प्रावधान नहीं है। निजी कंपनियों को खुली छूट दी जा रही है, लेकिन कर्मचारियों के लिए कोई गारंटी नहीं।”

    उन्होंने आरोप लगाया कि—

    ⚠️ निजी कंपनियों को लाभ, कर्मचारियों को बाहर का रास्ता

    ⚠️ वर्षों से सेवा दे रहे आउटसोर्स कर्मी अस्थायी घोषित

    ⚠️ वेतन, भविष्य निधि और सामाजिक सुरक्षा पर सीधा हमला

    ⚠️ राज्य बिजली बोर्ड को कमजोर कर निजीकरण को बढ़ावा

    📉 हिमाचल मॉडल पर खतरा

    रविंद्र ठाकुर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में बिजली सेवा सिर्फ़ व्यवसाय नहीं, जनसेवा है। पहाड़ी क्षेत्रों में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारी रीढ़ की हड्डी हैं। यदि इन्हें हटाया गया, तो—

    ⚡ दूरदराज़ इलाकों में बिजली आपूर्ति चरमरा जाएगी

    ⚡ आपदा प्रबंधन और मरम्मत व्यवस्था ठप होगी

    ⚡ बेरोज़गारी और सामाजिक असंतोष बढ़ेगा

    ✊ यूनियन का अल्टीमेटम

    आउटसोर्स कर्मचारी यूनियन ने साफ़ शब्दों में कहा है कि—

    यदि बिल में रोज़गार सुरक्षा की गारंटी नहीं दी गई

    यदि छंटनी रोकने के स्पष्ट प्रावधान नहीं जोड़े गए

    तो प्रदेश-भर में आंदोलन, धरना और कार्य बहिष्कार किया जाएगा।

    🛑 ABD का सवाल सत्ता से

    क्या बिजली सुधार के नाम पर आउटसोर्स कर्मियों की बलि दी जाएगी?

    क्या निजी मुनाफ़ा, जनसेवा से बड़ा हो गया है?

    अखण्ड भारत दर्पण इस जनविरोधी संशोधन पर अपनी नज़र बनाए रखेगा और आउटसोर्स कर्मचारियों की आवाज़ को सत्ता के गलियारों तक पहुंचाता रहेगा।

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