AICC बैठक या सियासी शक्ति-प्रदर्शन? सवालों के घेरे में प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व
10 फ़रवरी : ऑनलाइन डैस्क। डी० पी० रावत: विशेष रिपोर्ट। अखण्ड भारत दर्पण (ABD) न्यूज़
आज देश की राजधानी नई दिल्ली में हिमाचल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार के नेतृत्व में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सभी जिलाध्यक्ष AICC की बैठक में पहुँचे। तस्वीरों में अनुशासन, एकजुटता और संगठन की ताक़त का प्रदर्शन साफ़ दिखा — लेकिन ज़मीनी हकीकत इससे कितनी मेल खाती है, यही सबसे बड़ा सवाल है।
❓ दिल्ली में बैठक, हिमाचल में बेचैनी
प्रदेश में
आर्थिक संकट
बेरोज़गारी
कर्मचारियों-पेंशनरों की नाराज़गी
बिजली, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था पर बढ़ता दबाव
इन तमाम मुद्दों के बीच पूरी जिला कांग्रेस का दिल्ली कूच राजनीतिक मजबूरी था या संगठनात्मक दिखावा — इस पर बहस तेज़ हो गई है।
🔍 क्या यह आत्ममंथन था या सत्ता-संरक्षण?
कांग्रेस नेतृत्व का दावा है कि AICC बैठक में
संगठन को मज़बूत करने
सरकार और संगठन के बीच समन्वय
आगामी रणनीति
पर चर्चा हुई।
लेकिन सवाल यह है कि क्या जिलाध्यक्षों ने ज़मीनी असंतोष, कार्यकर्ताओं की उपेक्षा और जनभावनाओं से कटे नेतृत्व की सच्चाई दिल्ली दरबार तक पहुँचाई?
या फिर
➡️ सब कुछ “सब ठीक है” की औपचारिक रिपोर्ट में दबा दिया गया?
⚠️ जिलाध्यक्ष: जनता की आवाज़ या नेतृत्व की ढाल?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि
आज जिलाध्यक्षों की भूमिका
जनता और कार्यकर्ताओं की आवाज़ बनने की बजाय
प्रदेश नेतृत्व की ढाल बनने तक सीमित होती जा रही है।
अगर संगठन का निचला ढांचा ही असंतोष छिपाने लगे, तो सत्ता का आधार खोखला होना तय है।
🗳️ 2027 की आहट और 2026 की हकीकत
लोकसभा चुनावों की स्मृतियाँ अभी ताज़ा हैं और पंचायत-नगर निकाय चुनाव सामने हैं। ऐसे में
दिल्ली में शक्ति-प्रदर्शन से ज़्यादा ज़रूरी था हिमाचल में भरोसा बहाल करना।
🖊️ ABD का सवाल
क्या कांग्रेस नेतृत्व आत्मालोचना के लिए तैयार है?
क्या जिलाध्यक्षों की दिल्ली यात्रा से हिमाचल की समस्याएँ हल होंगी?
या फिर यह भी एक और “राजनीतिक फोटो-ऑप” बनकर रह जाएगी?
जनता जवाब चाहती है — और जवाब अब सिर्फ़ बैठकों से नहीं, ज़मीनी फैसलों से देने होंगे।🔥
