शिमला में भाजपा का Social Media Influencer & Intellectual Meet—जनसरोकार गायब, सेल्फ़ी पॉलिटिक्स हाज़िर!
10 फ़रवरी : ऑनलाइन डैस्क। डी० पी० रावत: विशेष रिपोर्ट। अखण्ड भारत दर्पण (ABD) न्यूज़
केंद्रीय बजट 2026-27 को लेकर भारतीय जनता पार्टी हिमाचल प्रदेश द्वारा शिमला में आयोजित किया जा रहा “Social Media Influencer and Intellectual Meet” कई गंभीर सवालों को जन्म दे रहा है।
भाजपा प्रदेश सह-प्रभारी संजय टंडन और प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल की विशेष उपस्थिति वाले इस कार्यक्रम को पार्टी विकसित भारत बजट के प्रचार के रूप में पेश कर रही है, लेकिन ज़मीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग दिखाई देती है।
❓ सवाल यह नहीं कि बजट क्या कहता है, सवाल यह है कि
क्या बजट पर बहस होगी या सिर्फ़ ब्रांडिंग?
हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में —
बढ़ते कर्ज़,
बेरोज़गारी,
सेब उत्पादकों की बदहाली,
बिजली, पानी और परिवहन पर बढ़ते बोझ,
और आपदा-प्रभावित क्षेत्रों की अनदेखी
इन सब पर इंटेलेक्चुअल मीट में खुली, ईमानदार चर्चा होगी — या फिर चुनिंदा सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के ज़रिये बजट की “डिजिटल तारीफ़” करवाई जाएगी?
🎭 इंटेलेक्चुअल मीट या इको-चैंबर?
जिस दौर में सोशल मीडिया का इस्तेमाल जनमत निर्माण से ज़्यादा जनमत भ्रम के लिए हो रहा है, ऐसे में सवाल उठता है कि —
क्या यह कार्यक्रम स्वतंत्र बौद्धिक विमर्श का मंच है,
या फिर सरकार-समर्थक नैरेटिव को रील, पोस्ट और हैशटैग के ज़रिये परोसने की रणनीति?
📉 विकसित भारत का सपना, हिमाचल की ज़मीनी सच्चाई
जब हिमाचल के युवा रोजगार के लिए दर-दर भटक रहे हों,
किसान MSP और लागत का हिसाब मांग रहे हों,
और आम जनता महंगाई से जूझ रही हो —
तो बजट की तालियां सोशल मीडिया हॉल में क्यों,
और जवाब विधानसभा व संसद में क्यों नहीं?
🧠 बुद्धिजीवी वही, सवाल वही, जवाब ग़ायब?
हर बार वही चेहरे, वही प्रशंसा, वही “सब अच्छा है” का कोरस —
क्या भाजपा नेतृत्व को डर है कि असली बुद्धिजीवी सवाल पूछेंगे?
✍️ ABD का सवाल
👉 क्या विकसित भारत बजट का मतलब सिर्फ़ डिजिटल प्रचार है?
👉 क्या हिमाचल के मुद्दे ट्रेंड नहीं करते, इसलिए मंच से बाहर हैं?
👉 क्या सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर अब नीति-निर्माण का नया चेहरा बन चुके हैं?
जनता अब पोस्ट नहीं, पॉलिसी चाहती है।
रील नहीं, रियल जवाब चाहती है।🔥
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