प्रस्तावित बिजली अधिनियम नियम 2003 (संशोधन बिल-2025) पर भड़के कर्मचारी नेता
शिमला,9 फ़रवरी।
ऑनलाइन डैस्क।
✍️ अखण्ड भारत दर्पण (ABD) न्यूज़ |
हिमाचल प्रदेश में प्रस्तावित बिजली अधिनियम नियम 2003 (संशोधन बिल-2025) को लेकर राज्य भर में चिंता की लहर तेज़ हो गई है।
हिमाचल प्रदेश राज्य बिजली बोर्ड कर्मचारी बिजली यूनियन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष झाबे राम शर्मा ने इस संशोधन को “उपभोक्ताओं के लिए महंगी बिजली और सरकारी बोर्ड के निजीकरण का रास्ता खोलने वाला ख़तरनाक कदम” बताया है।
🔴 “यह बिल सुधार नहीं, बिजली के बाज़ारीकरण की पटकथा है” – झाबे राम शर्मा
झाबे राम शर्मा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह संशोधन बिजली वितरण व्यवस्था को निजी कंपनियों के हवाले करने की नींव है, जिससे आम उपभोक्ता, किसान और छोटे उद्योग सबसे ज़्यादा प्रभावित होंगे।
⚠️ मुख्य दुष्प्रभाव — जो सरकार नहीं बता रही
💸 1️⃣ बिजली होगी महंगी
संशोधन के बाद लाइसेंस आधारित मल्टी-डिस्कॉम सिस्टम लागू होगा।
निजी कंपनियाँ लाभ वाले शहरी क्षेत्रों को चुनेंगी और घाटे वाले ग्रामीण इलाकों को नज़रअंदाज़ करेंगी।
👉 नतीजा: बिजली दरों में भारी बढ़ोतरी।
⚖️ 2️⃣ क्रॉस सब्सिडी खत्म होने का खतरा
अभी घरेलू उपभोक्ता और किसान, औद्योगिक उपभोक्ताओं से मिलने वाली क्रॉस सब्सिडी से राहत पाते हैं।
संशोधन के बाद यह व्यवस्था धीरे-धीरे समाप्त की जाएगी।
👉 सीधा असर: गरीब, किसान और मध्यम वर्ग पर बिजली बिल का बोझ।
🏭 3️⃣ राज्य बिजली बोर्ड का निजीकरण
झाबे राम शर्मा ने चेताया कि यह संशोधन
✔️ बोर्ड को कमजोर करेगा
✔️ संपत्तियाँ निजी हाथों में जाएँगी
✔️ कर्मचारी-हितों और सेवा सुरक्षा पर हमला होगा
“बोर्ड घाटे में नहीं, बल्कि निजीकरण की साज़िश में डाला जा रहा है” – शर्मा
🌄 4️⃣ पहाड़ी राज्यों के साथ अन्याय
हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्यों में
वितरण लागत ज़्यादा
आबादी बिखरी हुई
मौसम चुनौतीपूर्ण
निजी कंपनियाँ यहाँ निवेश से बचेंगी, जिससे ग्रामीण हिमाचल अंधेरे की ओर धकेला जाएगा।
🔥 यूनियन का ऐलान
झाबे राम शर्मा ने कहा कि यदि यह संशोधन वापस नहीं लिया गया तो
राज्यव्यापी आंदोलन
जनजागरण अभियान
उपभोक्ताओं को साथ लेकर संघर्ष
तेज़ किया जाएगा।
🗣️ ABD सवाल पूछता है
❓ क्या बिजली अब सेवा नहीं, सिर्फ़ मुनाफ़ा बन जाएगी?
❓ क्या आम उपभोक्ता निजी कंपनियों के भरोसे छोड़ दिया जाएगा?
❓ क्या हिमाचल का सार्वजनिक बिजली मॉडल खत्म किया जा रहा है?
📢 निष्कर्ष
बिजली अधिनियम संशोधन-2025 केवल कानूनी बदलाव नहीं,
बल्कि आम जनता की जेब, राज्य की संपत्ति और ऊर्जा संप्रभुता पर सीधा हमला है।
अब सवाल यह नहीं कि बिजली किसे मिले—
सवाल यह है कि क्या बिजली जनता की रहेगी या कंपनियों की?
