उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय मानवाधिकार का मुख्य उद्देश्य धरातल पर जाकर यह सुनिश्चित करना है कि नागरिकों को दिए गए मानवीय अधिकार उन्हें मिल रहे हैं या नहीं। नागरिकों को दिए गए मानवीय अधिकारों का कोई उल्लंघन तो नही हो रहा। इसके साथ यह भी सुनिश्चित करना है कि केंद्र सरकार और प्रदेश सरकार द्वारा संचालित की जा रही योजनाओं और सभी कानून एवं एक्टों की पूर्ण रूप से पालना हो रही है या नही। उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश के ऊना, हमीरपुर व कांगड़ा प्रवास के दौरान उनका मुख्य औचित्य बच्चों के शैक्षणिक संस्थान, जिला अस्पताल, पीएचसी, सीएचसी सहित कारागार का निरीक्षण करना है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश प्रवास के दौरान उनके द्वारा पूरी जानकारी हासिल की जाएगी कि नागरिकों को कोई भी परेशानी न हो। यदि नागरिकों के अधिकारों का किसी प्रकार से उल्लंघन/हनन होता पाया जाता है तो एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करके अध्यक्ष राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को भेजी जाएगी जिस आधार पर आगामी कार्रवाई की जाती है। उन्होंने बताया कि संविधान में आर्टिकल 21 के तहत नागरिकों को अपनी मानव गरिमा और जीवन के सभी पहलुओं के साथ रहने का अधिकार है।
उन्होंने निरीक्षण के दौरान किशोर न्याय अधिनियम के तहत पाई गई बारे ज़िला उपायुक्त को अवगत करवाया तथा इस संबंध में आवश्यक दिशा निर्देश दिये। इसके अतिरिक्त उन्होंने देर रात तक संस्थान का निरीक्षण किया।
इस अवसर पर सहायक आयुक्त वरिन्द्र शर्मा, डीपीओ नरेंद्र कुमार, बाल संरक्षण अधिकारी कमलदीप सिंह, सीडब्लूसी चेयर पर्सन ऊना, प्रिंसिपल सिस्टर संजना, सिस्टर नीलम मीनाक्षी राणा उपस्थित रहे।
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