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    Thursday, March 23, 2023

    एचपीयू की एसएफआई इकाई ने शहीदी दिवस के मौके पर भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को अर्पित की श्रद्धांजलि दी।

    हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय एसएफआई इकाई ने भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव का 92वां शहीद दिवस मनाया। एसएफआई ने इस उपलक्ष पर नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया तथा भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को श्रद्धांजलि दी गई ।
    नुक्कड़ में भगत सिंह तथा अन्य क्रान्तिकारियों के जीवन को दर्शाया गया।साथ ही इन क्रांतिकारियों के विचारों को लोगों तक पहुंचाया गया।
    एस एफ आई ने 21 से 23 मार्च तक विभिन्न गतिविधियों के द्वारा विश्वविद्यालय में शहीद दिवस को मनाया।इसी कड़ी में वीरवार को आखरी दिन पिंक पैटल पर छात्रों के समक्ष इस नुक्कड़ नाटक को दिखाया गया।
    नाटक के अंत में बात रखते हुए एसएफआई विश्वविद्यालय इकाई सचिवालय सदस्य साहिल ने कहा कि 1931 में आज ही के  दिन भगत सिंह तथा उनके दो साथी राजगुरु और सुखदेव देश की आजादी के लिए साम्राज्यवादी ताकतों से लड़ते हुए फांसी के फंदे पर झूल गए थे । परंतु दुर्भाग्य की बात है कि आजाद भारत के जिस सपने को लेकर वे लोग मौत को गले लगा गए वह सपना आज के युवाओं की आंखों से धूमिल होता जा रहा है। 
    साहिल ने कहा कि देश के अंदर अनेक ऐसे संगठन है जो भगत सिंह के नाम का उपयोग राजनीतिक फायदे के लिए तो करते हैं परंतु उनका भगत सिंह के विचारों से दूर-दूर तक कोई सरोकार नहीं है । आजादी के बाद की प्रत्येक सरकारों ने सुनियोजित तरीके से भगत सिंह के विचारों को युवाओं से दूर रखने के प्रयास किए तथा भगत सिंह को भीड़ इकट्ठा करने का एक जरिया मात्र बनाकर रख दिया ।
    उन्होंने कहा कि भगत सिंह समाजवाद के प्रबल समर्थक थे। उनकी स्पष्ट समझ थी कि आजाद भारत एक समाजवादी देश हो ताकि सभी के अधिकार व स्वतंत्रता सुरक्षित रहे। परंतु आज हम देख रहे हैं कि सत्ता पर उन ताकतों का कब्जा है जो पूंजीपतियों के कदमों में नतमस्तक है। ऐसे में आज भगत सिंह के विचारों की अहमियत पहले से कहीं अधिक बढ़ जाती है। 
    एसएफआई विश्वविद्यालय इकाई सचिव सुरजीत ने कहा कि एसएफआई एक ऐसा छात्र संगठन है जो भगत सिंह की विरासत लिए हुए है तथा हमेशा उनके विचारों को लेकर उनके सपनों के भारत के लिए संघर्षरत है। पिछले लंबे समय से एसएफआई मांग कर रही थी कि समरहिल चौक पर भगत सिंह की मूर्ति स्थापित की जाए तथा इस चौक का नाम भगत सिंह के नाम पर रखा जाए। 2012 के अंदर शिमला में जो नगर निगम चुनकर आई थी उसने यह प्रस्ताव पास किया कि समर हिल चौक में भगत सिंह की मूर्ति को स्थापित किया जाएगा तथा उस चौक का नाम भगत सिंह के नाम पर रखा जाएगा परंतु 2017 के अंदर भाजपा समर्थित नगर निगम ने उस प्रस्ताव को ठंडे बस्ते में डाल दिया। हद तो तब हो गई जब एबीवीपी ने वहां पर सावरकर का चित्र बनवा दिया।
    सुरजीत ने आरोप लगाया कि एबीवीपी राजनीतिक लाभ के लिए भगत सिंह के नाम का उपयोग तो करती है परंतु अंदर खाने उनके विचारों से नफरत करती है। भगत सिंह और सावरकर विचारों के मामले में दो अलग-अलग ध्रुवों पर खड़े व्यक्ति हैं। जहां भगत सिंह की मूर्ति लगनी थी वह एबीवीपी  द्वारा सावरकर के चित्र को बनाना यह दर्शाता है कि इनकी राजनीतिक मंशा क्या है। देश को आज इन फर्जी राष्ट्र भक्तों को पहचानने और इन्हें सत्ता से उखाड़ फेंकने की जरूरत है। यही उन शहीदों के लिए हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
    एसएफआई ने यह मांग की कि 2012 के शिमला नगर निगम ने जो तय किया था उसके अनुसार समरहिल चौक पर भगत सिंह की मूर्ति स्थापित की जाए तथा समरहिल चौक का नाम शहीदे आजम भगत सिंह के नाम पर रखा जाए। यदि प्रशासन इस मांग को जल्द पूरा नहीं करता है तो एसएफआई आने वाले समय में इसके लिए आंदोलन करेगी जिसका जिम्मेवार नगर निगम प्रशासन तथा प्रदेश सरकार होगी ।

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