गौरतलब है कि पिछले वर्ष पीएचडी मामलों को लेकर प्रदेश विश्वविद्यालय में छात्र संगठनों ने पीएचडी दाखिला प्रणाली को लेकर कई सवाल उठाये थे। उसी की भांति इस वर्ष भी विद्यार्थी परिषद विश्वविद्यालय इकाई ने एक मामला उठाते हुए कहा कि नियमों को ताक पर रखते हुए प्रदेश विश्वविद्यालय सरकार के दबाव के कारण अपने चहितों की रि-एडमिशन करवाने का काम कर रही है।
गौरतलब है कि प्रदेश विश्वविद्यालय में 100 से अधिक ऐसे शोधार्थी हैं जिनकी पीएचडी कैंसिल हो चुकी है। लेकिन प्रदेश विश्वविद्यालय किसी एक व्यक्ति विशेष की पीएचडी को सरकारी दबाव के कारण रिवाइव कर अन्य शोधार्थियों के साथ अन्याय करने का काम कर रही है।
करण ने कहा कि नियमों के अनुसार अगर किसी शोधार्थी की एचडी कैंसिल हो जाती है तो उसे पुनः दाखिला नहीं मिलता है। लेकिन प्रदेश विश्वविद्यालय प्रशासन किसी एक व्यक्ति विशेष के पीएचडी मे पुनः दाखिला देकर नियमों को तोड़ रही है । विद्यार्थी परिषद का यह मानना है कि किसी एक व्यक्ति विशेष को इस तरीके से नियमों को ताक पर रखते हुए पुनः दाखिला देना गलत है। अगर विश्वविद्यालय पीएचडी में पुनः दाखिला देना चाहता है तो सभी ऐसे शोधार्थियों को जिनकी पीएचडी कैंसिल हुई है उन सभी को पुनः दाखिला दे।
विद्यार्थी परिषद ने विश्वविद्यालय प्रशासन सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर सरकारी दबाव के कारण किसी व्यक्ति विशेष की पीएचडी में रीएडमिशन होती है तो विद्यार्थी परिषद के विरोध का सामना विश्वविद्यालय प्रशासन वह सरकार को करना पड़ेगा।
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