छात्र अभिभावक मंच ने शिमला शहर के निजी स्कूलों द्वारा पिकनिक व टुअर के नाम पर छात्रों व अभिभावकों से हज़ारों रुपये की ठगी व मानसिक शोषण पर कड़ा रोष जाहिर किया है। मंच ने इसे सरकार व शिक्षा विभाग की निजी स्कूलों से मिलीभगत करार दिया है। मंच ने मांग की है कि पिकनिक व टुअर की अनिवार्यता के नाम पर किए जा रहे छात्रों व अभिभावकों के शोषण पर तुरन्त रोक लगाई जाए। सरकार के वर्ष 2018 -19 के आदेशों के विरुद्ध अनुचित शैक्षणिक व्यवहार को अमल में लाने वाले निजी स्कूल प्रबंधनों पर कठोर कार्रवाई अमल में लाई जाए।
मंच के संयोजक विजेंद्र मेहरा व सह संयोजक विवेक कश्यप ने कहा है कि निजी स्कूल प्रबंधन एक बार पुनः तानाशाही पर उतर आए हैं और वे छात्रों व अभिभावकों का मानसिक व आर्थिक शोषण कर रहे हैं। निजी स्कूल प्रबन्धन छात्र अभिभावक मंच के आंदोलन के फलस्वरूप वर्ष 2018 - 19 में बने नियमों का कड़ा उल्लंघन कर रहे हैं व सीधे मुनाफाखोरी पर उतर आए हैं। वर्ष 2018 - 19 में मंच के आंदोलन के बाद तत्कालीन एसडीएम शिमला शहरी नीरज चांदला ने आदेश जारी करके निजी स्कूलों में पिकनिक व टुअर की अनिवार्यता पर रोक लगा दी थी। उन्होंने इस संदर्भ में अभिभावकों पर मानसिक दबाव बनाने वाले स्कूलों पर कठोर कार्रवाई करते हुए उचित ठोस दिशा निर्देश जारी किए थे। इन आदेशों के तहत किसी भी छात्र को पिकनिक व टूअर के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है। इन आदेशों में स्पष्ट था कि पिकनिक व टुअर की अनिवार्यता नियमों के विरुद्ध है तथा छात्रों व अभिभावकों को उक्त टूअर व पिकनिक के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है। पिछले चार साल व कोरोना काल में निजी स्कूलों ने इन आदेशों को लागू किया लेकिन 2023 के वर्तमान सत्र में शिमला शहर के कुछ निजी स्कूलों ने पिकनिक व टुअर के संदर्भ में जो सर्कुलर जारी किया है, उसमें अभिभावकों व छात्रों को पिकनिक व टुअर में न जाने की कोई ऑप्शन नहीं दी गई है। सर्कुलर व एनओसी सर्टिफिकेट इस तरह से बनाया गया है कि न चाहते हुए भी छात्रों व अभिभावकों को वह फॉर्म भरना पड़ेगा व उनकी मर्जी के बगैर भी एनओसी देना पड़ेगा। इस तरह अपनी सहमति व्यक्त करने के सिवाए उनके पास कोई चारा नहीं है। टुअर व पिकनिक के लिए इस सर्कुलर में निजी स्कूल प्रबंधनों ने एनओसी जारी करने के संदर्भ में एकतरफा फरमान जारी कर दिया है। यह पूरी तरह से एसडीएम शिमला शहरी द्वारा वर्ष 2018 - 19 में दिए गए आदेशों का उल्लंघन है। यह संविधान के अनुच्छेद 39 (एफ) के तहत छात्रों को प्राप्त उनके नैतिक व भौतिक अधिकारों का भी हनन है। सर्वविदित है कि एनुअल फंक्शन, पिकनिक व टुअर के जरिए निजी स्कूल प्रबंधन छात्रों व अभिभावकों की खुली लूट करते रहे हैं। उन्होंने सरकार व शिक्षा विभाग को चेताया है कि अगर प्रारंभिक शिक्षा व उच्चतर शिक्षा निदेशक ने ठोस कार्रवाई न की तो मंच शिक्षा निदेशालय का घेराव करने से नहीं चूकेगा। निजी स्कूल प्रबंधनों द्वारा मुनाफाखोरी का कार्य आजकल बड़े जोरों - शोरों से चल रहा है। वे सर्कुलरों के माध्यम से छात्रों व अभिभावकों पर टुअर व पिकनिक पर जाने के लिए दबाव बना रहे हैं। टुअर व पिकनिक में छात्रों की जबरन भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए स्कूल प्रबंधकों द्वारा यह तर्क दिया जा रहा है कि सभी छात्र इसमें शामिल हों नहीं तो इस सत्र की आगामी पिकनिक में उन्हें हर हाल में शामिल होना पड़ेगा जिसका खर्चा इससे भी ज्यादा होगा। इस तरह अनुचित शैक्षणिक व्यवहार अमल में लाते हुए निजी स्कूल प्रबन्धन छात्रों व अभिभावकों को टुअर व पिकनिक में जाने के लिए सुनियोजित तरीके से मजबूर कर रहे हैं। यह पूरी तरह से अनैतिक है व इस पर सरकार तथा उच्च शिक्षा विभाग की चुप्पी समझ से परे है। उन्होंने प्रदेश सरकार से इस सन्दर्भ में तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है ताकि छात्रों व अभिभावकों के मानसिक व आर्थिक शोषण पर लगाम लगाई जा सके।
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