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    Friday, May 1, 2026

    नशे के खिलाफ निफ्ट कांगड़ा के छात्रों की पहल, डॉक्यूमेंट्री से उजागर हुई कड़वी सच्चाई


    परस राम भारती
    बंजार, 1 मई
    अखण्ड भारत दर्पण (ABD) न्यूज़


    सामाजिक जिम्मेदारी का सराहनीय उदाहरण पेश करते हुए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (निफ्ट) कांगड़ा के छात्र-छात्राओं ने नशे की समस्या पर एक संवेदनशील और प्रभावशाली डॉक्यूमेंट्री तैयार की है। यह परियोजना “मिशन संभव-वार अगेंस्ट ड्रग्स” अभियान के सहयोग से तैयार की गई, जिसे हिमालयन वालंटियर्स टूरिज्म (एचवीटी) फाउंडेशन संचालित कर रहा है।
    निफ्ट के छात्र-छात्राओं आइशा, आरुषि, भाव्या और नमन की टीम ने कुल्लू जिले के विभिन्न क्षेत्रों का दौरा कर नशे की जमीनी हकीकत को करीब से समझा। टीम उन स्थानों तक भी पहुंची, जहां नशेड़ी एकत्र होकर नशा करते हैं। इन अनुभवों ने छात्रों को समस्या की गंभीरता का वास्तविक अहसास कराया।
    डॉक्यूमेंट्री में उभरी सच्चाई
    छात्रों द्वारा तैयार डॉक्यूमेंट्री में नशे की लत, उसके दुष्प्रभाव, उपचार प्रक्रिया और पुनर्वास के बाद समाज में दोबारा जुड़ने की चुनौतियों को प्रमुखता से दिखाया गया है। रिहैबिलिटेशन केंद्रों में विभिन्न पृष्ठभूमि के लोगों से बातचीत के दौरान यह सामने आया कि नशा किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के हर वर्ग को प्रभावित कर रहा है।
    “सजा नहीं, सहारा जरूरी”
    डॉक्यूमेंट्री का मुख्य संदेश यही है कि नशे की समस्या का समाधान केवल सख्त कानून नहीं, बल्कि समाज के सहयोग, समझ और स्वीकार्यता में निहित है। इस पहल को सामाजिक कार्यकर्ता पंकी सूद की जीवन यात्रा से प्रेरणा मिली, जिन्होंने लगभग 20 वर्ष पूर्व नशे से मुक्ति पाकर “मिशन संभव” की शुरुआत की थी।
    पंकी सूद ने कहा कि नशे से जूझ रहे लोगों को समाज से अलग करने के बजाय उन्हें सहयोग देना चाहिए। परिवार, स्कूल और समाज के संयुक्त प्रयासों से ही उन्हें मुख्यधारा में वापस लाया जा सकता है।
    विशेषज्ञों की राय
    नशा विशेषज्ञ डॉ. वैद्य के अनुसार, नशे से उबरने के लिए केवल चिकित्सा उपचार ही नहीं, बल्कि मानसिक और सामाजिक समर्थन भी अत्यंत आवश्यक है।
    इस परियोजना का मार्गदर्शन निफ्ट कांगड़ा के एक पूर्व बीबीसी डॉक्यूमेंट्री निर्माता एवं प्राध्यापक द्वारा किया गया, जिन्होंने छात्रों को सामाजिक विषयों पर संवेदनशील और जिम्मेदार प्रस्तुति के लिए प्रेरित किया।
    अभियान का विस्तार
    “मिशन संभव” अभियान को अब और व्यापक रूप देने की योजना है। इसके तहत अगस्त माह में लद्दाख, कश्मीर और कारगिल में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस पहल को ट्राइडेंट ऑटोमोबाइल्स, बेंगलुरु के संस्थापक समीर चौधरी द्वारा कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) के तहत आर्थिक सहयोग भी मिला है।
    यह पहल स्पष्ट करती है कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल सरकार या संस्थाओं की नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। जागरूकता, संवेदनशीलता और सहयोग से ही नशामुक्त समाज का निर्माण संभव है।


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