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    Sunday, May 24, 2026

    जोगिंद्रा बैंक में करोड़ों की अनियमितताओं के आरोप, उच्च स्तरीय जांच की मांग तेज

     अखंड भारत दर्पण(ABD)न्यूज़ 

    विशेष रिपोर्ट  : डी० पी० रावत

    सोलन/शिमला, 24 मई।



    हिमाचल प्रदेश के सहकारी बैंकिंग क्षेत्र में उस समय हलचल मच गई जब अधिवक्ता मुकेश कुमार शर्मा ने जोगिंद्रा सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड (JCCB) के कुछ अधिकारियों पर वित्तीय अनियमितताओं, कथित एनपीए घोटाले, ऑडिट रिपोर्टों में हेरफेर तथा बैंकिंग नियमों के उल्लंघन से जुड़े गंभीर आरोप लगाए हैं। मामले को लेकर उन्होंने विभिन्न विभागों और नियामक संस्थाओं के समक्ष विस्तृत शिकायतें दर्ज कराते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।

    जानकारी के अनुसार, अधिवक्ता मुकेश कुमार शर्मा ने 30 अप्रैल 2026 को NABARD के मुख्य सतर्कता अधिकारी (CVO) को एक विस्तृत शिकायत भेजी थी। शिकायत में बैंक के कुछ अधिकारियों पर करोड़ों रुपये के ऋण मामलों में कथित अनियमितताओं, ऑडिट प्रक्रियाओं को प्रभावित करने तथा वित्तीय गड़बड़ियों को छिपाने के आरोप लगाए गए हैं। सूत्रों के मुताबिक, इस शिकायत को 19 मई 2026 को आगे की कार्रवाई के लिए हिमाचल प्रदेश के रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां कार्यालय को भेजा गया।



    अपनी नवीनतम शिकायत में अधिवक्ता शर्मा ने बैंक के एक अधिकारी गुरमीत सिंह पर आरोप लगाया है कि उन्होंने शाखा प्रबंधक रहते हुए संयुक्त देयता समूह (JLG) ऋणों के वितरण में बैंकिंग नियमों और नियामकीय दिशानिर्देशों का कथित रूप से पालन नहीं किया। शिकायत के अनुसार, इन ऋण खातों में आवश्यक दस्तावेजी जांच और सुरक्षा प्रक्रियाओं में गंभीर कमियां बरती गईं, जिसके परिणामस्वरूप लाखों रुपये की राशि एनपीए के रूप में लंबित हो गई।

    शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि बैंक प्रबंधन ने बढ़ते एनपीए और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामलों को दबाने के लिए संबंधित अधिकारी को बाद में हेड ऑफिस में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपीं। अधिवक्ता शर्मा का दावा है कि इस दौरान बड़े पैमाने पर ऋण खातों, वसूली प्रक्रियाओं और दस्तावेजों में कथित हेरफेर कर वास्तविक स्थिति को छिपाने का प्रयास किया गया।

    मामले में बैंक के कई वरिष्ठ अधिकारियों के नाम लेते हुए अधिवक्ता शर्मा ने उन पर कथित मिलीभगत, ऑडिट रिपोर्टों को प्रभावित करने तथा बैंक की वित्तीय स्थिति को गलत तरीके से प्रस्तुत करने के आरोप लगाए हैं। शिकायत के अनुसार, कुछ अधिकारी वर्षों से एक संगठित तंत्र के रूप में कार्य कर रहे हैं, जिसके कारण गंभीर वित्तीय मामलों में प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पाई।

    शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि कुछ मामलों में ऑडिट रिपोर्टों को कथित रूप से इस प्रकार तैयार किया गया जिससे वास्तविक एनपीए और वित्तीय जोखिमों की स्थिति सामने न आ सके। अधिवक्ता शर्मा का कहना है कि उन्होंने पूर्व में भी विभिन्न विभागों को कई शिकायतें भेजी हैं, लेकिन अब तक किसी भी स्तर पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

    इस पूरे प्रकरण के सामने आने के बाद सहकारी बैंकिंग क्षेत्र, खाताधारकों और कर्मचारियों के बीच चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाती है तो बैंकिंग व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।

    अधिवक्ता मुकेश कुमार शर्मा ने दावा किया है कि उनके पास आरोपों से संबंधित पर्याप्त दस्तावेजी और वित्तीय साक्ष्य उपलब्ध हैं, जिन्हें आवश्यकता पड़ने पर जांच एजेंसियों के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। उन्होंने मामले की उच्च स्तरीय विजिलेंस जांच, स्वतंत्र फोरेंसिक ऑडिट तथा दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

    फिलहाल पूरे मामले पर निगाहें NABARD और रजिस्ट्रार सहकारी समितियां, हिमाचल प्रदेश की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। हालांकि, आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है और संबंधित अधिकारियों या बैंक प्रबंधन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। जांच के बाद ही आरोपों की सत्यता स्पष्ट हो सकेगी।

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