एसएफआई के राज्य सचिव एवं अध्यक्ष अमित ठाकुर एवं रमन थारटा के नेतृत्व में एसएफआई के 20 नेताओं के एक समूह ने हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री से भेंट कर संक्षिप्त ज्ञापन सौंपा और हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला एवं सरदार पटेल मण्डी में शिक्षकों की भर्ती की जांच गठित करने का आग्रह किया।
अमित ठाकुर एवं रमन थारटा ने इन चार प्रमुख मुद्दों की व्याख्या की:
1. हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला एवं सरदार पटेल विश्वविद्यालय, मण्डी में शिक्षकों की भर्ती की जांच गठित की जाए। विगत तीन वर्षों में (कोविड काल में भी) 270 से अधिक शिक्षकों की भर्ती यूजीसी विनियम/विश्वविद्यालय/राज्य के प्रावधानों के विपरीत की जा रही है। जिससे कम से कम 25-30 पीढ़ी का करियर बर्बाद हो जाएगा। एसपी यूनिवर्सिटी मंडी का भी यही हाल है। इसलिए, माननीय उच्च न्यायालय के मौजूदा/पूर्व न्यायाधीश के तहत एक उच्च-शक्ति जांच समिति का गठन करना बहुत जरूरी है। यह उन वास्तविक और प्रतिभाशाली उम्मीदवारों के साथ न्याय होगा जिन्हें फर्जीवाड़ा की कीमत पर बाहर कर दिया गया है।
2. सहायक प्रोफेसर (कॉलेज संवर्ग) के चयन के लिए चयन मानदंड बहाल करें। एचपीपीएससी 100 प्रतिशत साक्षात्कार के आधार पर सहायक प्रोफेसरों (कॉलेज संवर्ग) की भर्ती करता है। अंतिम चयन के लिए स्क्रीन/लिखित परीक्षा में प्राप्त अंकों पर विचार नहीं किया जाता है। अधिकांश समय यह देखा गया है कि स्क्रीन/लिखित परीक्षा में योग्यता के आधार पर उम्मीदवारों को हाशिये पर रखा जाता है और उनका चयन नहीं किया जाता है। 2019 में इसे देखते हुए एचपीपीएससी ने अपने नियमों में संशोधन किया कि अंतिम चयन 65:35 के आधार पर होगा यानि अंतिम चयन के लिए 65 प्रतिशत वेटेज लिखित/स्क्रीन टेस्ट में प्राप्त अंकों और 35 प्रतिशत साक्षात्कार के लिए दिया जाएगा। लेकिन उस अधिसूचना को अचानक वापस ले लिया गया, इसका कारण वे ही जानते हैं। छात्रों और युवाओं के हितों में 65:35 के आधार पर चयन पद्धति को बहाल करने का अनुरोध किया गया ।
3. छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकार यानि SCA चुनाव को बहाल करें।
4. कॉलेजों में सभी खाली शिक्षण पदों को भरना।
उपरोक्त मुद्दों पर मुख्यमंत्री से मिलने वाले समूह में अमित ठाकुर (राज्य सचिव), रमन थर्टा (प्रदेश अध्यक्ष), अनिल ठाकुर (जिला सचिव), सुरजीत (एचपीयू परिसर सचिव), उपेंद्र, हरीश, संतोष, साक्षी, गंगा, नेहा, भानु, कमल, शानू शाहवाज, कुलदीप, रहमतुल्लाह, सतोष, पवन, संजीव, रविंदर और साहिल मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने इन चारों मुद्दों को ध्यान से सुना और आश्वासन दिया कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय और अन्य सभी महत्वपूर्ण मुद्दों पर बहुत जल्द कार्रवाई की जाएगी।
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