जोगिंद्रा बैंक में विवादित पदोन्नतियों पर उठे सवाल, NABARD तक पहुंची शिकायत
अखण्ड भारत दर्पण (ABD )न्यूज़
1 जून 2026
शिमला/सोलन। जोगिंद्रा सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड (JCCB), सोलन में कथित वित्तीय अनियमितताओं, विवादित पदोन्नतियों और भ्रष्टाचार के आरोपों ने तूल पकड़ लिया है। अधिवक्ता मुकेश कुमार शर्मा ने NABARD, मुंबई के मुख्य सतर्कता अधिकारी (CVO) को विस्तृत शिकायत भेजकर रजिस्ट्रार सहकारी सभाएं (RCS), हिमाचल प्रदेश और बैंक प्रबंधन की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आरसीएस शिमला के कुछ अधिकारियों ने बैंक प्रबंधन के साथ मिलीभगत कर उन अधिकारियों को संरक्षण प्रदान किया, जिनके विरुद्ध विभिन्न शिकायतें, एफआईआर और सतर्कता जांचें लंबित हैं। शिकायतकर्ता के अनुसार वर्ष 2022-23 की विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) प्रक्रिया में भारी अनियमितताएं हुईं और पात्र कर्मचारियों की अनदेखी कर पक्षपातपूर्ण तरीके से पदोन्नतियां दी गईं।
अधिवक्ता मुकेश कुमार शर्मा ने बताया कि निशा ठाकुर की ओर से 14 जनवरी 2026 को आरसीएस शिमला को कानूनी नोटिस भेजकर डीपीसी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच की मांग की गई थी। इसके बाद 16 जनवरी और 18 मार्च 2026 को NABARD सहित विभिन्न सक्षम प्राधिकरणों को शिकायतें भी भेजी गईं, लेकिन अब तक किसी प्रकार की प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
शिकायत में बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों राम पाल (AGM), कुलदीप सिंह (AGM), हरीश शर्मा (AGM) और गुरमीत सिंह (सीनियर मैनेजर) सहित अन्य अधिकारियों पर अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए पदोन्नति प्रक्रिया प्रभावित करने के आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता का दावा है कि इन अधिकारियों के विरुद्ध शिकायतें और जांच लंबित होने के बावजूद उन्हें संवेदनशील पदों पर बनाए रखा गया।
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि एफआईआर संख्या 45/2019 और 29/2023 में राम पाल के विरुद्ध आपराधिक मामले लंबित हैं और वह जमानत पर चल रहे हैं। वहीं राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की एफआईआर संख्या 00003/2025 में कुलदीप सिंह, राम पाल और गुरमीत सिंह सहित अन्य व्यक्तियों के नाम सामने आए हैं। इसके बावजूद आरोपित अधिकारियों को प्रशासनिक संरक्षण मिलने के आरोप लगाए गए हैं।
अधिवक्ता शर्मा ने बैंक के प्रबंध निदेशक पंकज सूद की भूमिका की स्वतंत्र जांच की भी मांग की है। शिकायत में आरोप है कि बैंक प्रबंधन ने कथित रूप से ऐसे अधिकारियों को संरक्षण दिया जिनके विरुद्ध गंभीर आरोप और जांच लंबित हैं। साथ ही, ईमानदार कर्मचारियों के वार्षिक गोपनीय प्रतिवेदन (ACR) प्रभावित कर उन्हें पदोन्नति से वंचित किए जाने का भी आरोप लगाया गया है।
शिकायतकर्ता ने NABARD से मांग की है कि वर्ष 2022 की डीपीसी सहित पिछले वर्षों की सभी पदोन्नति प्रक्रियाओं की स्वतंत्र सतर्कता जांच कराई जाए। साथ ही लंबित शिकायतों और कानूनी नोटिसों पर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए तथा जिन अधिकारियों के विरुद्ध गंभीर आरोप, एफआईआर या सतर्कता जांच लंबित हैं, उन्हें जांच पूरी होने तक किसी भी प्रकार का पदोन्नति लाभ न दिया जाए।
यह मामला अब केवल सेवा संबंधी विवाद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सहकारी बैंकिंग संस्थानों में पारदर्शिता, जवाबदेही और सार्वजनिक धन की सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है। अब सभी की निगाहें NABARD और संबंधित नियामक संस्थाओं की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

No comments:
Post a Comment