कॉप-19 में, ताजे पानी में रहने वाले कछुये बटागुर कचुगा (बंगाल आदि में पाया जाने वाला लाल खोल वाला कछुआ) को संरक्षण सूची में शामिल करने के भारत के प्रस्ताव का सभी पक्षकारों ने भारी समर्थन किया है। सभी पक्षकारों ने इसकी सराहना की और लागू करने की रजामंदी दी।
साइट्स ने जमीन और ताजे पानी में रहने वाले कछुओं के संरक्षण के लिये भारत द्वारा किये जाने वाले कामों की भरपूर सराहना की। साइट्स ने देश में वन्यजीव अपराधों और कछुओं के गैर-कानूनी कारोबार के खिलाफ भी भारत के प्रयासों की प्रशंसा की। जमीन और ताजे पानी में रहने वाले कछुओं के बारे में साइट्स सचिवालय ने प्रस्ताव दस्तावेज पेश किया था, जिसमें भारत के वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो के ऑप्रेशन टर्टशील्ड के सकारात्मक परिणामों का स्पष्ट उल्लेख किया गया है। इन प्रयासों के तहत ताजे पानी में रहने वाले कछुओं के शिकार और उनके गैर-कानूनी कारोबार से जुड़े अपराधियों की धड़-पकड़ शामिल है। देश के विभिन्न भागों में एजेंसियों ने बड़ी मात्रा में जब्ती की कार्रवाई भी की है।
साइट्स कॉप-19 में भारत ने देश में जमीन और ताजे पानी में रहने वाले कछुओं के संरक्षण के बारे में अपनी प्रतिबद्धता दोहरायी। भारत ने जमीन और ताजे पानी में रहने वाले कछुओं की कई प्रजातियों को रेखांकित किया। ये कछुये विलुप्त होने की खतरनाक स्थिति में पहुंच चुके हैं और इन्हें वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 में सम्मिलित करके उच्चस्तरीय सुरक्षा दी जा रही है। भारत ने साइट्स परिशिष्ट II में कई प्रजातियों को शामिल करने का आग्रह किया है, जिसकी बदौलत वन्यजीव प्रजातियों को दुनिया भर में गैर-कानूनी कारोबार का शिकार बनने से सुरक्षा मिलेगी।
भारतीय शिष्टमंडल का नेतृत्व वन महानिदेशक व विशेष सचिव ने किया। शिष्टमंडल साइट्स के कॉप की मौजूदा बैठक में विलुप्त प्राय वन्यजीव तथा वनस्पति के संरक्षण और कारोबार से जुड़े सूचीबद्ध विषयों पर चर्चा कर रहा
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