अक्टूबर, 2022 में देश में कुल कोयले का उत्पादन 448 मिलियन टन (एमटी) रहा, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि के उत्पादन की तुलना में 18 प्रतिशत अधिक है। कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) से कोयले के उत्पादन की वृद्धि भी 17 प्रतिशत से अधिक है। कोयला मंत्रालय नवंबर, 2022 के अंत तक घरेलू कोयला आधारित संयंत्रों में 30 मिलियन टन का स्टॉक तैयार करने की योजना बना रहा है। स्टॉक बनाने की यह योजना तैयार की गई है, ताकि 31 मार्च, 2023 के अंत तक, ताप विद्युत् संयंत्रों (टीपीपी) का स्टॉक 45 मिलियन टन तक पहुँच जाए। इसके साथ पिटहेड पर भी कोयले के स्टॉक को बढ़ाने की योजना है।
इस साल के पहले सात महीनों के दौरान, औसत रेक प्रति दिन उपलब्धता में 9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो कोयले की अधिक मात्रा के परिवहन और बिजली संयंत्रों में स्टॉक बनाने में मदद कर रही है। विद्युत मंत्रालय भी रेल-सह-सड़क माध्यम से कोयले के परिवहन को बढ़ा रहा है। सीआईएल ने सभी बिजली उत्पादन कंपनियों को कोयला परिवहन (लिफ्टिंग) के आरसीआर मोड के लिए अगले आठ महीनों के कोटे संबंधी सूचना दी है। इससे बिजली उत्पादन कंपनियों को पहले से परिवहन लॉजिस्टिक्स की योजना बनाने में मदद मिलेगी।
समुद्री मार्ग से कोयले के परिवहन को बढ़ावा देने के लिए पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय, विद्युत मंत्रालय, रेलवे और कोयला मंत्रालय मिलकर काम कर रहे हैं। अभी तक एमसीएल से पारादीप तक कोयले की ढुलाई रेल द्वारा और उसके बाद पूर्वी तट पर बिजली संयंत्रों को रेल-समुद्र-रेल मार्ग के माध्यम से की जा रही है। सरकार देश के पूर्वी भागों में स्थित कोयला खदानों से देश के पश्चिमी तट या उत्तरी भागों में स्थित बिजली संयंत्रों तक कोयले के परिवहन को बढ़ावा दे रही है। तदनुसार, पारादीप को कोयले की ढुलाई की क्षमता में वृद्धि की जा रही है। अगले साल की शुरुआत में, आरएसआर माध्यम से पश्चिमी तट के संयंत्रों के लिए कोयले के परिवहन को शुरू करने की योजना है। सरकार तीनों संभावित तरीकों से कोयले के परिवहन को बढ़ावा देने की योजना बना रही है।
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