सतलुज के आँचल में माता खेगसू का पावन धाम लुहरी से तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित है । - अखण्ड भारत दर्पण (ABD) न्यूज़

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    Friday, June 26, 2026

    सतलुज के आँचल में माता खेगसू का पावन धाम लुहरी से तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित है ।

     सतलुज के आँचल में माता खेगसू का पावन धाम लुहरी से तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित है ।



    हिमाचल प्रदेश की पावन धरा देव-संस्कृति और अलौकिक आस्था का केंद्र है। इसी देवभूमि में, कल-कल बहती सतलुज नदी के तट पर बसा कुसुम्बा माता (खेगसू )गाँव अपनी अद्वितीय आध्यात्मिक आभा के लिए जाना जाता है। यहाँ विराजमान माता खेगसू(कुसुम्बा माता)का भव्य मंदिर न केवल स्थापत्य कला का एक बेजोड़ नमूना है, बल्कि लाखों भक्तों की अगाध श्रद्धा का अटूट केंद्र भी है।


    अलौकिक सौंदर्य और प्राकृतिक छटा

    माता का यह भव्य मंदिर जहाँ स्थित है, वहाँ प्रकृति स्वयं अपना सर्वस्व न्योछावर करती प्रतीत होती है।

     

    सतलुज की लहरें:

    मंदिर के चरणों को पखारती सतलुज नदी की अविरल धारा यहाँ के वातावरण में एक असीम शांति और पवित्रता घोलती है। नदी की सुरीली ध्वनि मंदिर में होने वाले भजनों और शंखनाद के साथ मिलकर एक दिव्य संगीत पैदा करती है।

     पहाड़ों की ओट:

    ऊंचे-ऊंचे पहाड़ों और हरे-भरे पेड़ों के बीच स्थित यह मंदिर ऐसा प्रतीत होता है मानो प्रकृति ने स्वयं माता के विश्राम के लिए इस सुंदर कोने को चुना हो।


    वास्तुकला और भव्यता

    खेगसू माता का यह मंदिर पारंपरिक पहाड़ी शैली (काठ-कुणी शैली) और आधुनिक भव्यता का एक अद्भुत संगम है।

     काष्ठ कला (Wood Carving):

    मंदिर की दीवारों और छतों पर की गई लकड़ी की बारीक नक्काशी देखते ही बनती है। इसमें उकेरी गई देवी-देवताओं की आकृतियाँ प्राचीन हिमाचली संस्कृति और शिल्पकारों की समृद्ध विरासत को दर्शाती हैं।

     दिव्य गर्भगृह:

    मंदिर के भीतर माता खेक्सू की दिव्य और सौम्य प्रतिमा विराजमान है। माता का शृंगार और उनकी आभा इतनी सम्मोहक है कि दर्शन मात्र से ही भक्तों के सारे कष्ट और मानसिक तनाव दूर हो जाते हैं।

    अगाध श्रद्धा और लोक मान्यताएँ

    कहा जाता है कि माता खेक्सू इस पूरे क्षेत्र की रक्षक और प्रदाता हैं। यहाँ सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है।



     स्थानीय रक्षक:

    खेगसू और आसपास के ग्रामीण माता को अपनी कुलदेवी और रक्षक के रूप में पूजते हैं। खेती की बुआई हो, फसलों की कटाई हो या घर का कोई भी शुभ कार्य, माता का आशीर्वाद लिए बिना यहाँ पत्ता भी नहीं हिलता।

     उत्सव और जातर (मेले):जब भी मंदिर में विशेष उत्सव, थिरशु या बूढ़ी दीपावली और लवी मेला जो अब रामपुर बुशहर में आयोजन होता है, खेगसू में केवल रस्म निभाई जाती है । इन उत्सवों के दौरान पूरा क्षेत्र ढोल-नगाड़ों, करनाल और रणसिंगों की गूंज से जीवंत हो उठता है। पारंपरिक वेशभूषा में सजे श्रद्धालु जब माता के रथ के आगे झूमते हैं, तो वह दृश्य अलौकिक और विहंगम होता है।

    सतलुज की लहरों का संगीत, पहाड़ों की शुद्ध हवा और माता खेगसू के दरबार से उठती धूप-दिए की सुगंध मिलकर इस पावन स्थल को साक्षात स्वर्ग बना देती है। यदि आप आत्मिक शांति और दैवीय ऊर्जा का अनुभव करना चाहते हैं, तो कुसुम्बा माता स्थित माता खेगसू का यह भव्य धाम एक बार अवश्य जाना चाहिए।

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