वैज्ञानिक तरीके से पहाड़ कटाई न होने का आरोप, 9 परिवारों के 28 सदस्य सुरक्षित स्थानों पर पहुँचे
कुल्लू। कीरतपुर-मनाली राष्ट्रीय राजमार्ग के चौड़ीकरण का काम कुल्लू जिले के बलीचौकी क्षेत्र के पाँच गाँवों—तनीपरी, शाला नाल, जाला नाल, तन्हुल और थलौट—के लिए मुसीबत बन गया है। हाईवे निर्माण के दौरान वैज्ञानिक तरीकों से पहाड़ कटाई न होने के आरोप के बीच जमीन धंसने और भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि पिछले तीन वर्षों से लगातार मिट्टी खिसक रही है, घरों और खेतों में दरारें पड़ चुकी हैं। सोमवार को तनीपरी में भूस्खलन सुरंग के ऊपर गाँव के किनारे तक पहुँच गया, जिससे 9 परिवारों के 28 सदस्य घर छोड़ने को मजबूर हुए। सभी अब बेघर हैं और मुआवजे का इंतजार कर रहे हैं।
स्थानीय निवासी बताते हैं कि पहाड़ियों को सीधा काटा गया, जबकि इसका विरोध भी किया गया था। बालीचौकी के एसडीएम देवी सिंह ने माना कि भूस्खलन का मुख्य कारण हाईवे चौड़ीकरण है। उन्होंने NHAI को प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा हेतु रिटेनिंग दीवारें बनाने के निर्देश दिए हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि NHAI की लापरवाही से यह स्थिति बनी और अब तक कोई ठोस मदद नहीं मिली। घटना ने एक बार फिर सवाल खड़े किए हैं कि विकास परियोजनाओं में पर्यावरण और स्थानीय लोगों की सुरक्षा को अनदेखा करने के नतीजे कितने गंभीर हो सकते हैं।
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