(पारो शैवलिनी की रिपोर्ट)
धर्म और राजनीति से उपर है समाज। मगर,लोग या तो केवल धर्म की बात करते हैं या फिर केवल राजनीति की। समाज और सामाजिकता की बात नहीं करते।यही कारण है कि लोग समाज से दूर हो जाते हैं। उक्त बात मिहिजाम के समाजसेवी दर्शनलाल प्रभाकर ने देश की 79वीं स्वाधीनता दिवस के अवसर पर चित्तरंजन स्थित अखंड भारत दर्पण के संपादक पारो शैवलिनी के साथ अपनी बात साझा करते हुए कही।उन्होंने अखंड भारत दर्पण के संपादक के एक सवाल का जवाब देते हुए कहा,देश के राष्ट्रीय गीत में हिन्दू,मुस्लिम,सिख और ईसाई की बात की है।भारत देश में रहने वाला हर इन्सान सबसे पहले भारतीय है।बाद में और कुछ।
मगर,ये दुर्भाग्य है कि हम सबकुछ हैं केवल इन्सान नहीं। अपनी कथनी को और स्पष्ट करते हुए प्रभाकर ने कहा,अगर सही मायने में हम समाज से जुड़े होते तो हम केवल मैं और तू में उलझ कर नहीं रह जाते।
उन्होंने आगे कहा,हम मुस्लिमों पर तो तरह-तरह के आरोप बड़ी आसानी से लगा देते हैं,कि उन्हें जहाँ-तहाँ नमाज अदा नहीं करना चाहिए।लेकिन,खुद हिन्दू होकर सावन महीने में कांवर लेकर सड़क से ट्रेन तक सभी को परेशानी में पूरे महीने डाले रहते हैं। हमारे ईसाई भाई भी केवल गिरजाघर और सिख भाई केवल गुरूद्वारे तक ही सीमित रहते हैं। हमें समाज में समाज के तौर-तरीकों को मानकर ही चलना चाहिए।तभी समाज में भाईचारा बरकरार रह सकता है।नहीं तो राजनीति और धर्म के ठेकेदार हमें एक होकर रहने नहीं देंगे।
बताते चलें,अखंड भारत दर्पण के चित्तरंजन कार्यालय में शुक्रवार को समाजसेवी दर्शनलाल प्रभाकर ने तिरंगा फहराया।मौके पर अखंड भारत दर्पण के संपादक पारो शैवलिनी के साथ भरत यादव,संजीत कुमार, जितेन्द्र कर्मकार,आशीष कुमार,दीपा,आशा,गौरी,सुमन,आदि देर शाम तक आते-जाते रहे और स्वाधीनता दिवस का मीठा लड्डू खाकर मुँह मीठा कर खुशी का इज़हार करते रहे।
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