नंगे पैर लगातार सातवीं बार श्रीखंड महादेव के दरबार पहुंची बागीपुल की ईशानी—बाढ़ में सबकुछ बहा, पर आस्था नहीं डगमगाई - अखण्ड भारत दर्पण (ABD) न्यूज़

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    Tuesday, July 15, 2025

    नंगे पैर लगातार सातवीं बार श्रीखंड महादेव के दरबार पहुंची बागीपुल की ईशानी—बाढ़ में सबकुछ बहा, पर आस्था नहीं डगमगाई

     


    बागीपुल (निरमण्ड)।

    बाढ़ ने घर छीन लिया, लेकिन महादेव की दीवानी ईशानी की आस्था नहीं डिगी। पिछली साल 31 जुलाई की रात श्रीखंड महादेव यात्रा मार्ग के भीम डवारी क्षेत्र में बादल फटा था। इसकी चपेट में आकर बागीपुल का आधा बाजार तबाह हो गया था। कई लोग बेघर हुए थे, उन्हीं में एक थीं ईशानी। मगर इस साल फिर से, वो भी नंगे पैर, निकल पड़ीं अपने भोलेनाथ के दर्शन को।


    ईशानी बताती हैं, “इस बार मेरी सातवीं यात्रा थी। हर बार की तरह इस बार भी नंगे पैर निकली थी। 9 जुलाई को यात्रा शुरू की और कठिन ग्लेशियर, पत्थरों की खड़ी चढ़ाई, बारिश और ठंड के बीच दर्शन पूरे किए।”


    ईशानी का घर भले ही बाढ़ में बह गया, लेकिन उनके हौसले को कोई नहीं बहा सका। उन्होंने कहा, “महादेव ने सबकुछ ले लिया, लेकिन मुझे उनसे मिलने का रास्ता फिर भी दिया। जब तक शरीर साथ देगा, तब तक नंगे पैर ही बाबा के दर्शन करूंगी।”


    32 किलोमीटर नंगे पैर यात्रा—ईशानी की भक्ति बनी मिसाल


    श्रीखंड महादेव की यात्रा 32 किलोमीटर की होती है, जिसमें ग्लेशियर, पथरीले रास्ते और कड़ाके की ठंड चुनौती बनकर सामने खड़े रहते हैं। मगर ईशानी जैसी श्रद्धालुओं के लिए यह सिर्फ एक यात्रा नहीं, बल्कि आत्मिक मिलन होता है।


    ईशानी बताती हैं, “इस बार बारिश ज्यादा हुई, लेकिन दर्शन का आनंद ही अलग रहा। रास्ते में इस बार प्रशासन की ओर से ट्रैकिंग रस्सियां लगाई गई थीं, जिससे सफर थोड़ा आसान हो गया।”


    घबराएं नहीं, पूरी सुरक्षा है’—ईशानी का संदेश बाहरी श्रद्धालुओं को


    ईशानी ने प्रशासन की व्यवस्थाओं की तारीफ करते हुए कहा, “बाहरी राज्यों से आने वाले श्रद्धालु घबराएं नहीं। इस बार पूरे रास्ते में मेडिकल, ट्रैकिंग, खाने और विश्राम की पूरी व्यवस्था की गई है। मैं हर बार अकेले या साथियों के साथ जाती हूं, लेकिन डर का कोई सवाल नहीं।”


     यात्रा में शामिल हर कदम में भक्ति, हर सांस में आस्था—ईशानी की कहानी हर श्रद्धालु के लिए प्रेरणा है।

    भोलेनाथ की नगरी में जब भक्त बिना जूते के चल पड़ते हैं, तो रास्ते खुद बिछ जाते हैं।

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