हिमाचल प्रदेश में इन दिनों सेबों की तुलना में नाशपाती की डिमांड ज्यादा बढ़ गई है। मंडी में आ रहीं पेटियों की जमकर बिक्री हो रही है। यही कारण है कि किसानों और व्यापारियों की कमाई इन दिनों बढ़ गई है। वहीं खराब मौसम से सेब प्रभावित हो रहा है। बारिश न होने के कारण सेब के आकार पर विपरीत असर पड़ रहा है।
बारिश न होने और मानसून के धीमे पड़ने के कारण सेब सीजन में हो रही देरी टाइडमैन किस्म के सेब उत्पादकों को अपनी फसल के बेहतर दाम मिल रहे है।
मंडी में सेब की टाइडमैन, समर क्वीन और रेड जून किस्मों के साथ नाशपाती का कारोबार शानदार तेजी बनाए हुए है। वीरवार को पराला मंडी में विभिन्न किस्म सेब की 3881 पेटियां और नाशपाती की 8171 पेटियां बिकने के लिए पहुंची हैं।
मौसम के प्रतिकूल रहने से बागवानों के माथे पर चिंता की लकीरें उभर रही हैं। बारिश न होने की वजह से सेब के आकार पर विपरीत असर हो रहा है।
इसके अलावा पेड़ों पर पत्तियां झड़ने की समस्या भी दिन प्रतिदिन बढ़ रही है। कई बागवानों के बगीचों में सेब और पत्तियों में काले रंग के निशान भी परेशानी का सबब बनते जा रहे हैं।
मंडी में जमकर बिक रहीं पेटियां
वीरवार को पराला मंडी में 20 किलो भार की 3088 दस किलो भार की 750 पेटियां बिकने के लिए पहुंची। इस साल बागवानों के लिए फलों में नाशपाती की बम्पर फसल अच्छे परिणाम लेकर आई है।
मंडी में नाशपाती की बीस किलो की 5392 जबकि दस किलो की 2779 पेटियों की आमद रही।
मंडी में टाइड मेन किस्म को 20 से 75 रुपए प्रति किलो, समर क्वीन किस्म की 10 किलो की 87 पेटियों में लाए गए सेब को 15 से 35 रुपये प्रति किलो प्राप्त हुए। रेड जून किस्म की 43 पेटियों में पहुंचे सेब को 15 से 35 रुपये प्रति किलो के दाम प्राप्त हुए।
गुठलीदार फलों में प्लम की दो किलो की 1306 पेटियां मंडी में खरीद फरोख्त के लिए आई है। प्लम के दामों में हल्की बढ़ोतरी देखी गई। प्लम की पेटी को 75 रुपये तक के दाम मिले।
बागवानों के लिए केंटीन, वाहनों की पार्किंग, धन जमा करवाने और निकालने के लिए बैंक की सुविधा, शौचालय और रेन बसेरे और फसल लाने वाले वाहनों के वजन करने की सुविधाएं मंडी में उपलब्ध करवाई गई है।
छैला कैंची से पराला मंडी तक बनाई गई अलग लेन
छैला कैंची से पराला मंडी तक पिकअप वाहनों के लिए अतिरिक्त लेन के बनने से बागवानों ने ट्रैफिक जाम से निजात मिल गई है। बागवान अपने बगीचों से मंडी तक सेब की फसल को पहुंचाने के लिए पिकअप वाहन का इस्तेमाल करते हैं।
इसी वजह से मंडी तक कैंची से मंडी तक सेब ढोने वाली पिकअप के लिए एक अतिरिक्त लेन बनाई गई है, जिसमें यातायात को प्रभावित किए बिना सेब से लदी पिकअप मंडी में सेब उतारने के लिए अपनी बारी का इंतजार कर सकती है। बागवान आसानी से बिना ट्रैफिक जाम में फंसे पराला मंडी में अपनी फसलों को पहुंचा पा रहे हैं।
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