Tuesday, August 2, 2022
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5 अगस्त को शिमला में होने वाले प्रदर्शन में भाग लेंगे निरमण्ड ब्लॉक के सैकड़ों सेब उत्पादक।
5 अगस्त को शिमला में होने वाले प्रदर्शन में भाग लेंगे निरमण्ड ब्लॉक के सैकड़ों सेब उत्पादक।
महेंद्र कौशिक।
अखण्ड भारत दर्पण ।
2अगस्त 2022.
हिमाचल किसान सभा खण्ड इकाई निरमण्ड की बैठक मंगलवार को निरमण्ड कार्यालय में आयोजित की गई।बैठक में 5 अगस्त को संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर शिमला में होने वाले प्रदर्शन व संगठन को मजबूत करने के बारे में चर्चा की गई।
बैठक में उपस्थित सदस्यों को संबोधित करते हुए किसान सभा निरमण्ड ब्लॉक के अध्यक्ष देवकी नंद,सेब उत्पादक संघ निरमण्ड ब्लॉक के अध्यक्ष पूरण ठाकुर व किसान सभा निरमण्ड ब्लॉक के महासचिव जगदीश ने कहा कि देश व प्रदेश सरकार द्वारा लागू की जा रही नवउदारवादी कृषि नीतियों के चलते प्रदेश में कृषि संकट के दौर से गुजर रही है।इन नीतियों के कारण खाद,कीटनाशक व दवाइयों के दाम लगातार बढ़ रहे हैं।जिससे की लागत मूल्य बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि हाल ही इन नीतियों के चलते सरकार ने गते और ट्रे पर जीएसटी 12 से 18% बढ़ा दिया है जिससे की बागवानों को सेब को पैदा करने की लागत व पैकिंग की लागत लगभग दोगुना हो गई है। सेब पैदा करने वाला किसान ,बागवान सरकार की इन किसान विरोधी नीतियों के कारण परेशान है।हिमाचल प्रदेश में सेब की खेती का बहुत बड़ा योगदान है इससे हर वर्ष सरकार को लगभग 5500 करोड़ की आय प्राप्त होती है।उन्होंने कहा कि हालांकि प्रदेश सरकार द्वारा किसानों के दवाब के चलते जो GST मे वृद्धि की गई थी उसको वापिस तो लिया परंतु इसके बावजूद भी बाजार में ट्रे व कार्टन के दाम कम नहीं हुए हैं।जिस कारण बागवानों का आज भी बाजार मे शोषण हो रहा हैऔर उन्हें महंगे कार्टन व ट्रे लेने को मजबूर होना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार की नवउदारवादी नीतियों से हिमाचल प्रदेश में किसानी व बागवानी निरंतर घाटे का सौदा बन रही है। जहां एक ओर किसान बागवान लगातार कर्ज के तले दब रहे हैं वहीं दूसरी ओर प्रदेश सरकार ने कार्टन के दाम बढ़ा कर किसानों की चिंता को बढ़ा दिया है।प्रदेश में सेब का सीजन शुरू हो चुका है परंतु प्रदेश सरकार किसानों की समस्याओं के प्रति गंभीर नहीं है किसानों व बागवानों को उनके रहमों कर्मों पर छोड़ दिया है । किसानों को सेब की पैकिंग के लिए महंगा गत्ता व ट्रे लेने को मजबूर होना पड़ रहा है।पूरे प्रदेश में सड़कों की हालत खस्ता है। निरमण्ड ब्लॉक में भी सभी सड़कें जगह-जगह से क्षतिग्रस्त है। सरकार व प्रशासन सड़कों को दुरुस्त करने में नाकाम है।
सरकार के मिलीभगत के चलते प्रदेश में आढती लगातार बागवानों का शोषण कर रहे हैं।सेब की बोली लगने के बाद भी बागवानों से 20 रुपये से लेकर 30 रुपये की कटौती की जा रही है और लोगों को समय पर पैसों की अदायगी नहीं कर रही हैं। बागवानों के पिछले साल के लाखों रुपए आढ़तियों के पास फंसे हुए हैं ।लोडिंग और अनलोडिंग के भी मनमाने दाम वसूले जा रहे हैं। जिस पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है।
हिमाचल किसान सभा प्रदेश सरकार से मांग करता है कि सरकार शीघ्र अति शीघ्र हस्तक्षेप करते हुए गते और ट्रे के दाम कम करें, हिमाचल में भी जम्मू कश्मीर की तर्ज पर मंडी मध्यस्थता योजना के तहत ए ग्रेड का सेब 60 रुपये बी ग्रेड का 44 व सी ग्रेड का सेब 24 रुपये प्रति किलो के हिसाब से लिया जाए,खाद दवाई और बीजों पर सब्सिडी को पुनःबहाल किया जाए,निरमण्ड ब्लॉक की सभी सड़कों की दशा सीजन से पहले दुरुस्त किया जाए।।आढतियों के पास बागवान के पैसों की शीघ्र अति शीघ्र अदायगी की जाए अन्यथा उनके लाइसेंस रद्द किए जाए।
उन्होंने कहा कि 5 अगस्त को शिमला में होने वाले प्रदर्शन में निरमण्ड ब्लॉक से सैंकड़ों की संख्या मे सेब उत्पादक हिस्सा लेंगे जिसको लेकर गांव ,- गांव में मीटिंगें की जा रही हैं।
बैठक में दुर्गा नंद,भगत राम,श्याम लाल,रूप लाल,प्रेम,ख्याला नंद,लाल चंद,तारा चंद,कश्मीरी सिंह,भीम सैन, प्रेम,श्याम लाल,देव राज,शिव राम, सुंदर दर सिंह,केवल राम,कृष्ण लाल,राज कुमारी,पदम,इंदिरा देवी,फुला देवी,राधा देवी,रोशनी देवी आदि उपस्थित थे।
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