➡️शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज ने निरमण्ड से मां अंबिका की छड़ी को श्रीखण्ड के लिए हरी झण्डी दिखा कर किया रवाना।
➡️इस मर्तबा श्रद्धालु आधिकारिक तौर पर कर सकेंगे ग्यारह से चौबीस जुलाई के मध्य श्री खण्ड यात्रा।
➡️निरमण्ड से श्रीखंड के लिए 26वीं छड़ी यात्रा रवाना।
➡️जिला प्रशासन ने श्रीखंड यात्रा के लिए जारी की एडवायजरी और श्रद्धालुओं से की सहयोग की अपील।
महेंद्र कौशिक, ब्यूरो निरमण्ड एवम गुर दास जोशी ब्यूरो रामपुर बुशहर।
कुल्लू जिले के नव गठित राजस्व उपमण्डल निरमण्ड के अधीन समुद्र तल से लगभग 18,570 फुट की ऊंचाई पर स्थित श्रीखण्ड महादेव नामक पर्वत शिखर की धार्मिक यात्रा इस मर्तबा दो वर्ष के बाद जिला प्रशासन की नियंत्रण में 11 जुलाई से 24 जुलाई तक आयोजित की जा रही है।
यह यात्रा उतरी भारत की सबसे कठिनतम धार्मिक यात्राओं में से एक है।
निरमण्ड कस्बे के अंतर्गत दशनामी जूना अखाड़ा से शनिवार को माता अम्बिका व स्वामी दत्तात्रेय की छब्बीसवीं छड़ी यात्रा फलाहारी बाबा महंत अशोक गिरि जी महाराज के नेतृत्व में छड़ी यात्रा समिति निरमण्ड के बैनर तले आरम्भ हुई।जिसका विधिवत शुभारंभ प्रदेश सरकार के शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज ने हरी झंडी दिखाकर किया।
उन्होंने इस मौके पर छड़ी यात्रा में देश के विभिन्न संत अखाड़ों से शामिल हुए लगभग पचास साधू सन्तों को श्रीखण्ड कैलाश दर्शन की शुभकामनाएं दीं।उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश देवी देवताओं की पावन भूमि है और जो शक्ति स्थल ऊँचाई पर स्थित है उनका दीदार पाने को भक्त उन जोखिमपूर्ण स्थलों की यात्रा करते हैं।
सुरेश भारद्वाज ने कहा कि इस यात्रा में भक्तों व श्रद्धालुओं को हर प्रकार की सुविधा मिले.इसके लिए सरकार ने इस यात्रा को श्रीखण्ड यात्रा ट्रस्ट के अधीन किया है।उन्होंने कहा कि इस तरह की धार्मिक यात्रियों से जहां स्थानीय रोजगार को बढ़ावा मिलता है।
वहीं धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलता है। उन्होंने कहा कि निरमण्ड समृद्ध संस्कृति व संस्कारों की धरती है ।ऐसे में धर्म की रक्षा व संस्कृति के संरक्षण के लिए धार्मिक यात्राएं व अनुष्ठान युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
श्री खंड यात्रा को लेकर प्रशासन ने श्रद्धालुओं के लिए दिशा निर्देश जारी किए हैं। यात्रा 11 जुलाई से 24 जुलाई 2022 तक होनी निश्चित हुई है। उपायुक्त आशुतोष गर्ग का कहना है कि यात्रा में पांच बेस कैम्प सिंहगाड़, थाचडू, कुंशा, भीमडवारी और पार्वतीबाग हैं। जिसमें प्रशासन ने श्रद्धालों की सुरक्षा के लिए प्रत्येक बेस कैम्प में एक सेक्टर मेजिस्ट्रट के अधीन मेडिकल, रेस्कयू पुलिस की टीमें तैनात है। सभी बेस कैम्पो में लगभग 20 स्वास्थ्य कर्मी, 30 पुलिस कर्मी व 40 सदस्य रेस्कयू हेतू तैनात है।
यात्रा के लिए पंजीकरण करना आवश्यक है जो की ऑनलाइन या ऑफलाइन किया जा सकता है। ऑनलाइन पंजीकरण के लिए https://shrikhandyatra.hp.gov.in/ लिंक 24 घंटे उपलब्ध है जिसका पंजीकरण शुल्क 200 रुपए रहेगा। ऑफलाइन पंजीकरण प्रथम बेस कैम्प सिंहगाड़ में सुबह 5 बजे से सांय 7 बजे तक करवाया जा सकता है।
उपायुक्त का कहना है कि यात्रा न करने की सूरत में तथा बेस कैम्प सिंहगाड़ में मेडिकल चेकअप में अस्वस्थ पाये जाने पर पंजीकरण शुल्क वापस नहीं होगा। 18 साल से कम तथा 60 साल से अधिक उम्र के व्यक्तियों को यात्रा करना मना है। पंजीकरण अनिवार्य है, बिना पंजीकरण के यात्रा करने पर किसी भी बेस कैम्प से वापस भेजा जा सकता है।
जिला प्रशासन ने एडवायजरी जारी करते हुए अपील की है कि श्रद्धालु चिकित्सा प्रमाण पत्र अपने साथ लेकर आएं तथा बेस कैम्प सिंहगाड़ में स्वास्थ्य जांच अवश्य कराएं। पूर्णतया स्वस्थ होने पर ही यात्रा करें। अकेले यात्रा न करें केवल साथियों के साथ ही यात्रा करें। चढाई धीरे धीरे चढे सांस फूलने पर वहीं रूक जायें। छाता, बरसाती, गर्म कपड़े, गर्म जूते, टार्च एंव डण्डा अपने साथ अवश्य लायें। प्रशासन द्वारा निर्धारित रास्तों का ही प्रयोग करें। किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या हेतू निकटतम कैंप में सम्पर्क करें।
सफाई का विशेष ध्यान रखने की अपील प्रशासन ने की है। दुर्लभ जड़ी बूटियों एंव अन्य पौधो के संरक्षण में सहयोग, इस यात्रा को पिकनिक अथवा मौजमस्ती के रूप में न लेने व केवल भक्तिभाव एंव आस्था से ही तीर्थ यात्रा करने का आग्रह भी प्रशासन ने किया है। श्रद्धालु किसी भी प्रकार का दान अथवा चढ़ावा केवल ट्रस्ट के दान पात्रों में ही डालें।
इन कार्यों के लिए रहेगी मनाही
प्रशासन की ओर से जारी दिशा निर्देशों के अनुसार सुबह 5 बजे से पहले और शाम 4 बजे के बाद बेस कैम्प सिंहगाड़ से यात्रा न करने को कहा गया है। उपायुक्त आशुतोष गर्ग का कहना है कि पार्वतीबाग से दोपहर 12 बजे के बादे कोई भी श्रदालु को नहीं जाने दिया जाएगा। बिना पंजीकरण एंव चिकित्सकीय रूप से फिट न होने पर यात्रा न करें। अपने साथियों का साथ न छोड़े, जबरदस्ती चढाई न चढ़ें व फिसलने वाले जूते न पहने यह घातक हो सकता है।
किसी भी प्रकार के शॉर्ट कट का प्रयोग न करें। खाली प्लास्टिक की बोतलें एंव रैपर इस्यादि खुले में न फेंके बल्कि अपने साथ वापिस लाकर कूड़ादान में डाले। जड़ी बूटियों एंव दुर्लभ पौधों से छेड़ छेड़ा न करें। किसी भी प्रकार के नशाले पदार्थों मदिरा इत्यादि का सेवन न करें।
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