हिमाचल 24 घंटे बुलेटिन 07/04/2021 - अखण्ड भारत दर्पण (ABD) न्यूज़

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    Wednesday, April 7, 2021

    हिमाचल 24 घंटे बुलेटिन 07/04/2021

    हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की स्नातक डिग्री कोर्स की 17 अप्रैल से शुरू होने वाली पहले, दूसरे और तीसरे वर्ष की परीक्षाओं में बिना प्रवेश पत्र के बैठने की अनुमति नहीं दी जाएगी।विवि प्रशासन ने कॉलेजों को इस संदर्भ में दिशा-निर्देश जारी किए हैं।यदि विद्यार्थी को ऑनलाइन इंटरनल असेसमेंट नहीं चढ़ी होगी तो इस परीक्षा में 35 फीसदी अंक नहीं ले पाएगा,  और उसका रोलनंबर जेनरेट ही नहीं होगा।

    सोलन की महिला डॉक्टर में यूके का नया स्ट्रेन  मिलने का मामला सामने आया है जो पहले वाले वायरस से 70 फीसदी ज्यादा संक्रामक है। प्रदेश सरकार ने नए कोरोना स्ट्रेन को लेकर सभी जिलों को अलर्ट कर दिया गया है। सभी सीएमओ को सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।महिला डॉक्टर के सहभागी साथियों की भी जाँच की जा रही है।आशंका जताई जा रही है की 15 अप्रैल के बाद यह नया स्ट्रेन बढ़ सकता हैं।

    देश भर में पहली बार हुए सर्वे से यह खुलासा हुआ है  कि हिमाचल प्रदेश में हिम तेंदुओं की संख्या 73 पाई गई है।इससे पहले वन्य जीव विभाग अपने स्तर पर अलग-अलग तरीकों से हिम तेंदुओं पर नजर रखता रहा है, जिसमें करीब तीन दर्जन हिम तेंदुए ही पाए गए थे। अब इनकी संख्या का सही पता सर्वे से चला है।  प्रदेश में 2018 में वन्य जीव विभाग और मैसूर स्थित नेचर कंजर्वेशन फाउंडेशन (एनसीएफ) की ओर से शुरू किया सर्वे अभियान तीन साल में पूरा हुआ। देश में पहली बार नई तकनीक से प्रदेश के 26112 वर्ग किलोमीटर में हिम तेंदुओं की गिनती के लिए सर्वे हुआ है।

    बोर्ड की ओर से निर्धारित पुस्तकें ही बच्चों को पढ़ाने के निर्देश निजी स्कूल प्रबंधन को दिए गए हैं। स्कूल शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डा. सुरेश कुमार सोनी ने बताया कि प्रदेश के सभी संबद्धता प्राप्त निजी शिक्षण संस्थान स्कूल शिक्षा बोर्ड से निर्धारित और प्रकाशित पाठ्य पुस्तकों, प्रायोगिक पुस्तकों को ही पढ़ाएंगे।पहली से लेकर जमा दो कक्षा तक वाणिज्य संकाय को छोड़कर अन्य सभी विषयों की पाठ्य पुस्तकें बोर्ड की ओर से मुद्रित की गई हैं। 

    ऊना जिले में सूखे के कारण गेहूं की फसल को 15 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। यह नुकसान ज्यादातर गैर सिंचित क्षेत्रों के किसानों को हुआ है। शुष्क मौसम के चलते खेतों में गेहूं की फसल उग तो गए, लेकिन फ़सल पानी की कमी के चलते खेतों में ही सूख गए हैं।इस वर्ष तो किसानो को भी दो वक़्त की रोटी के लिए पर्यावरण से लड़ना होगा।


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