Monday, March 2, 2026
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🎣 तीर्थन की लहरों में लौटा रोमांच: ट्राउट सीजन खुलते ही घाटी में गूंजा पर्यटन का बिगुल।
🎣 तीर्थन की लहरों में लौटा रोमांच: ट्राउट सीजन खुलते ही घाटी में गूंजा पर्यटन का बिगुल।
बंजार (जिला कुल्लू) 2 मार्च। परस राम भारती,
संवाददाता। अखण्ड भारत दर्पण (ABD) न्यूज़ :
* चार माह की पाबंदी खत्म, एंगलर्स का उमड़ा सैलाब — संरक्षण और रोजगार के नए अवसरों के साथ चमकी तीर्थन घाटी।
जिला कुल्लू के उपमंडल बंजार स्थित मनमोहक तीर्थन घाटी में 1 मार्च से ट्राउट मछली आखेट (फिशिंग) सीजन विधिवत शुरू हो गया है। नवंबर से फरवरी तक प्रजनन काल के चलते लगाए गए प्रतिबंध के समाप्त होते ही घाटी में एंगलर्स और सैलानियों की रौनक लौट आई है।
मत्स्य विभाग द्वारा चार माह तक तीर्थन नदी और इसके सहायक नालों में मछली पकड़ने पर पूर्ण रोक लगाई गई थी, ताकि ट्राउट मछलियों का संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके। अब परमिट व्यवस्था के तहत पर्यटक और स्थानीय लोग ट्राउट फिशिंग का आनंद ले सकेंगे।
🌊 पर्यटन को नई रफ्तार
ठंडी, स्वच्छ और कल-कल बहती धारा के लिए प्रसिद्ध तीर्थन घाटी में पाई जाने वाली ट्राउट मछली देश-विदेश के सैलानियों को आकर्षित करती है। फिशिंग सीजन खुलते ही घाटी के होमस्टे, गेस्ट हाउस और स्थानीय कारोबारियों में उत्साह देखा जा रहा है।
ग्रामीण पर्यटन के तेजी से बढ़ते कदमों के बीच ट्राउट फिशिंग इस क्षेत्र की पहचान बन चुकी है। यह न केवल रोमांच का अनुभव कराती है, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए स्वरोजगार के अवसर भी सृजित करती है।
🐟 संरक्षण पर सख्ती जरूरी
स्थानीय बुद्धिजीवियों और पर्यावरण प्रेमियों ने ट्राउट संरक्षण को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि अवैध शिकार, करंट, जाल और विस्फोटक जैसे खतरनाक तरीकों से मछली पकड़ना घाटी की जैव विविधता के लिए गंभीर खतरा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते कठोर कदम नहीं उठाए गए, तो नदी की प्राकृतिक संपदा प्रभावित हो सकती है।
📜 ऐतिहासिक निर्णय से मिला संरक्षण
तीर्थन नदी के संरक्षण का इतिहास भी गौरवपूर्ण रहा है। वर्ष 1975 में तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. वाई.एस. परमार की सरकार ने नदी की लगभग 40 किलोमीटर जलधारा को संरक्षित घोषित किया था। इस पहल में पूर्व विधायक दिले राम शबाब के प्रयास उल्लेखनीय रहे।
उस समय नदी की सुरक्षा के लिए होमगार्ड जवानों की तैनाती भी की गई थी। इसी दूरदर्शी निर्णय का परिणाम है कि आज भी तीर्थन में ट्राउट का अस्तित्व सुरक्षित है।
🏞 सरकार से मांग
स्थानीय लोगों ने सरकार और मत्स्य विभाग से फील्ड स्टाफ बढ़ाने तथा निगरानी तंत्र मजबूत करने की अपील की है। उनका कहना है कि तीर्थन घाटी आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रही है, ऐसे में इस प्राकृतिक धरोहर का संरक्षण सर्वोपरि होना चाहिए।
✨ ABD न्यूज़ संदेश :
“प्रकृति का आनंद तभी तक है, जब तक संरक्षण का संकल्प मजबूत है।”
तीर्थन की लहरें एक बार फिर एंगलर्स का स्वागत कर रही हैं — अब जिम्मेदारी हम सबकी है कि यह रोमांच और प्राकृतिक धरोहर आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रहे।
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About कमल जीत शीमार,ऑनलाइन डेस्क ब्यूरो।
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