ब्रेकिंग न्यूज: कुल्लू की बैहना पंचायत मनरेगा घोटाला उजागर! पूर्व प्रधान,सचिव, रोज़गार सेवक,जेई पूर्व वार्ड सदस्य के दोषी करार होने के बाद 5.5 लाख रूपये की संयुक्त वसूली का सख्त आदेश । - अखण्ड भारत दर्पण (ABD) न्यूज़

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Monday, March 2, 2026

ब्रेकिंग न्यूज: कुल्लू की बैहना पंचायत मनरेगा घोटाला उजागर! पूर्व प्रधान,सचिव, रोज़गार सेवक,जेई पूर्व वार्ड सदस्य के दोषी करार होने के बाद 5.5 लाख रूपये की संयुक्त वसूली का सख्त आदेश ।

 


2 मार्च,आनी/कुल्लू।

डी०पी० रावत।

अखण्ड भारत दर्पण(ABD) न्यूज़।

 हिमाचल प्रदेश के कुल्लू ज़िला में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत हुए एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश हो गया है। लोकपाल (ओम्बड्समैन) डॉ. संदीप कुमार ने 26 फरवरी 2026 को जारी अपने आर्डर  में ग्राम पंचायत बैहना के पूर्व प्रधान विनोद कुमार, पंचायत सचिव रथी देवी, जूनियर इंजीनियर विजय दत्त शर्मा, ग्राम रोजगार सेवक शशि कला और पूर्व वार्ड सदस्य सुख राम पर गंभीर अनियमितताओं का दोषी ठहराते हुए कुल 5,52,024 रूपये की वसूली का आदेश दिया है। यह राशि मनरेगा के तहत सड़क निर्माण में हुए फर्जीवाड़े, मशीनों के इस्तेमाल और नेपाली मजदूरों को लगाने से जुड़ी है।


यह मामला विकास खंड आनी की ग्राम पंचायत बैहना में वर्ष 2021-22 में कराए गए "सीसी ट्रैक्टर रोड कोटनाला से रोपड़ी" कार्य से जुड़ा है, जिसमें कुल 11 लाख रुपये की स्वीकृत राशि खर्च की गई थी। रोपड़ी गांव के 12 ग्रामीणों—रामकृष्ण ठाकुर, हिम्मत राम ठाकुर, मोहन लाल कटोच, सुभाष ठाकुर, कल्याण कटोच, विनीत डोगरा, अमन सक्सेना, कमलजीत कटोच, रितिक डोगरा, ज्ञान ठाकुर, तविंदर डोगरा और रोशन लाल—ने लोकपाल के पास शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि कार्य में नेपाली मजदूरों को लगाया गया, मशीनों (मिक्सर) का इस्तेमाल किया गया, कंक्रीट की मात्रा कम डाली गई, सड़क दो साल में ही क्षतिग्रस्त हो गई और सामग्री पर 94% खर्च (9,25,024 रुपये) के मुकाबले मजदूरी पर सिर्फ 6% (58,355 रुपये) ही खर्च किया गया। यह मनरेगा दिशानिर्देशों के 60:40 अनुपात का घोर उल्लंघन है।


लोकपाल के अनुसार जांच के दौरान दर्ज बयानों का हवाला देते हुए कहा गया है कि कार्य में स्थानीय ग्रामीणों की फर्जी हाजिरी लगाई गई और उनके खातों में आई मजदूरी की राशि वार्ड सदस्य सुख राम ने नकद वापस ले ली। मस्टर रोल नंबर 5070 में 9 ग्रामीणों (कल्याण चंद, राधा देवी, गुमत राम, शारदा देवी, सुषमा देवी, पवन कुमार, शालू देवी, किरना देवी और परवीना) के नाम पर 20,352 रुपये की फर्जी पेमेंट की गई, जबकि उन्होंने कोई काम नहीं किया। लोकपाल ने इसे "वित्तीय अनियमितता और सार्वजनिक धन की हेराफेरी" करार दिया।


ऑर्डर में स्पष्ट किया गया है कि सड़क निर्माण की लागत भी असंगत थी। पहले चरण में 94 मीटर सड़क पर प्रति मीटर 1,062 रुपये खर्च हुए, जबकि दूसरे चरण में 240 मीटर पर प्रति मीटर 4,097 रुपये—यानी 286% ज्यादा। इससे 5,31,672 रुपये की अतिरिक्त सामग्री खर्च का मामला बनता है, जो अनुचित है। लोकपाल ने इस राशि की वसूली के लिए पांचों दोषियों को संयुक्त रूप से जिम्मेदार ठहराया और प्रत्येक से 1,06,334 रुपये वसूलने का आदेश दिया। इसके अलावा फर्जी मजदूरी की 20,352 रुपये की राशि शशि कला और सुख राम से आधी-आधी (10,176 रुपये प्रत्येक) वसूलने को कहा गया।


लोकपाल ने विकास खंड अधिकारी (बीडीओ) को 40 दिनों के भीतर वसूली सुनिश्चित करने और रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। वसूली गई राशि एचडीएफसी बैंक के विशेष खातों में जमा की जाएगी। दोषी अधिकारियों को 40 दिनों में अपील का अधिकार है, लेकिन यदि वसूली नहीं हुई तो आगे की कार्रवाई होगी।


यह मामला ग्रामीण विकास विभाग, शिमला को भेजा गया है, जहां से इसे लागू करने के आदेश जारी होंगे। अखण्ड भारत दर्पण(ABD) न्यूज़ से बातचीत में शिकायतकर्ता रामकृष्ण ठाकुर ने कहा, "यह फैसला न्याय की जीत है। मनरेगा जैसी योजना में गरीबों का हक मारने वालों को सजा मिलनी चाहिए।" वहीं, दोषी अधिकारियों ने अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।


यह घटना हिमाचल में मनरेगा योजनाओं में व्याप्त भ्रष्टाचार की ओर इशारा करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों से ग्रामीण विकास पर असर पड़ता है।

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