डेढ़ लाख रूपये की लागत से कर डाली स्वास्थ्य उपकेन्द्र फरबोग भवन की मुरम्मत; जिस भवन का अब तक निर्माण ही नहीं हुआ।
डी० पी० रावत।
आनी,25 सितम्बर।
हिमाचल प्रदेश के ज़िला कुल्लू के विकास खण्ड आनी के तहत ग्राम पंचायत रोपा में कई सार्वजनिक कार्यों में कथित भ्रष्टाचार के आरोप हाल में ही पूर्व उप प्रधान कर्म ठाकुर ने लगाए थे।
सरकारी खजाने की लूट का एक और चौंका देने वाला मामला सामने आया है। ग्राम पंचायत रोपा में एक ऐसे स्वास्थ्य उप-केंद्र फरबोग के भवन की मुरम्मत की गई है जिसका अस्तित्व ही नहीं है। जी हां, सुनने में अविश्वसनीय लगे, मगर यह सच है। हिमाचल प्रदेश सरकार के ही 'जन समीक्षा' पोर्टल पर दर्ज दस्तावेज इसकी पुष्टि कर रहे हैं। पोर्टल के मुताबिक, फरबोग स्थित स्वास्थ्य उप-केंद्र के भवन की मरम्मत पर डेढ़ लाख रुपये खर्च किए गए और काम को पूरा घोषित किया गया। लेकिन धरातल की सच्चाई यह है कि इस स्वास्थ्य केंद्र का अपना कोई भवन है ही नहीं और यह पंचायत के सामुदायिक भवन में संचालित हो रहा है।
यह मामला सरकारी व्यवस्था में पनप रहे भ्रष्टाचार की पोल खोलने के लिए काफी है। इससे साफ जाहिर होता है कि कैसे बिना किसी ठोस कार्य के सिर्फ कागजों में हेराफेरी कर सरकारी धन को हड़प लिया जाता है। ग्रामीणों का आरोप है कि यह कोई अकेला मामला नहीं है, बल्कि पंचायत में कई ऐसे कार्य हैं, जिन्हें सिर्फ कागजों में ही अंजाम दिया गया है।
जन समीक्षा पोर्टल पर क्या दर्ज है?
· कार्य का नाम : आईडी BSP/2021/313 आर/ओ (रिपेयर ऑफ) प्राइमरी सब-हेल्थ सेंटर एट फरबोग
· वित्तीय वर्ष : 2021-22
· योजना : BASP
· कार्यान्वयन एजेंसी : बीडीओ, आनी
· कार्य का प्रकार : स्वास्थ्य और परिवार कल्याण - सामान्य स्वास्थ्य भवन (हेल्थ सब-सेंटर)
· स्वीकृत तारीख : 12 जनवरी, 2022
· स्वीकृत राशि : ₹ 1,50,000 (डेढ़ लाख रुपये)
· स्थिति : पूर्ण (Completed)
बीएमओ का बयान - 'सामुदायिक भवन में चल रहा है केंद्र'
इस पूरे मामले पर जब आनी के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (बीएमओ) डॉ. भागवत मेहता से बात की गई, तो उन्होंने इस भवन के अस्तित्व पर ही सवाल खड़े कर दिए। डॉ. मेहता ने अखण्ड भारत दर्पण (ABD) न्यूज़ को फोन पर बताया, "वर्तमान में स्वास्थ्य उप-केंद्र फरबोग पंचायत के सामुदायिक भवन में चल रहा है।" बीएमओ के इस बयान से साफ हो जाता है कि फरबोग में स्वास्थ्य उप-केंद्र का कोई अलग भवन नहीं है, जिसकी मरम्मत की जा सकती थी।
ग्रामीणों ने उठाए सवाल
ग्राम पंचायत रोपा के कई ग्रामीणों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उन्हें इस तरह के किसी मरम्मत कार्य की कोई जानकारी नहीं है। एक ग्रामीण ने कहा, "यह तो सीधे-सीधे सरकारी खजाने की लूट है। जिस भवन का कभी निर्माण ही नहीं हुआ, उसकी मुरम्मत का पैसा किसकी जेब में गया? इसकी जांच होनी चाहिए।" ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पंचायत में पिछले कुछ वर्षों में कई ऐसे कार्य हुए हैं, जिनकी वास्तविकता पर संदेह है।
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पूर्व उप प्रधान ने लगाए थे भ्रष्टाचार के आरोप
गौरतलब है कि ग्राम पंचायत रोपा में सार्वजनिक कार्यों में अनियमितताओं के आरोप इससे पहले भी लगते रहे हैं। कुछ समय पहले ही पंचायत के पूर्व उप प्रधान कर्म ठाकुर ने कई कार्यों में कथित भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। यह नया मामला उन आरोपों को और पुख्ता करता है।
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क्या कहता है नियम?
सरकारी नियमों के मुताबिक, किसी भी कार्य की स्वीकृति से पहले उसका प्रस्ताव तैयार किया जाता है, जिसमें कार्य की आवश्यकता, स्थान और वर्तमान स्थिति का ब्यौरा होता है। कार्य पूरा होने के बाद उसकी तकनीकी सहायक द्वारा आकलन (Assessment) की जाती है और तब जाकर भुगतान किया जाता है। इस मामले में सवाल यह है कि अगर भवन है ही नहीं, तो प्रस्ताव कैसे पास हुआ? आकलन कैसे हुआ और भुगतान किसके खाते में किया गया? यह सवाल प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाते हैं।
बीडीओ की प्रतिक्रिया
बीडीओ आनी विद्या चौहान ने ABD न्यूज़ को बताया कि उन्हें इस सम्बन्ध में अब तक कोई भी लिखित शिकायत नहीं मिली है। उन्होंने इस संदर्भ में मीडिया से जानकारी की पुष्टि की है। उन्होंने अगले हफ्ते मौके पर जाएंगी।
मौका देखने के बाद आवश्यक कार्यवाही अमल में लाई जाएगी।
क्या हो आगे की कार्रवाई?
यह मामला वित्तीय अनियमितता का एक गंभीर उदाहरण है। इसकी त्वरित और निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो रही है। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से अपेक्षा की जा रही है कि वे इस मामले में हस्तक्षेप करेंगे और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करेंगे। साथ ही, यह भी सुनिश्चित करेंगे कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
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डेढ़ लाख रूपये से की सामुदायिक भवन की मुरम्मत।
नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर एक संबंधित विभाग के एक कर्मचारी ने ABD न्यूज़ को बताया कि डेढ़ लाख रूपये से की सामुदायिक भवन की मुरम्मत की गई है।
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निष्कर्ष:
रोपा पंचायत का यह मामला सरकारी धन के दुरुपयोग और पारदर्शिता की कमी का जीता-जागता उदाहरण है। 'जन समीक्षा' जैसे पोर्टल का उद्देश्य पारदर्शिता लाना था, लेकिन इसी पोर्टल ने एक ऐसा सच उजागर कर दिया है, जो व्यवस्था की जड़ों में खोखलेपन को दिखाता है। अब यह जिला प्रशासन और सरकार की जिम्मेदारी है कि वह इस मामले की गहन जांच करे और आम जनता के विश्वास को फिर से कायम करे। नहीं तो, 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास' का नारा महज एक नारा बनकर रह जाएगा।
पाठकों से अपील :
अखण्ड भारत दर्पण ( ABD) न्यूज़ की ओर से पाठकों से अपील : अगर आपके क्षेत्र में भी इस तरह की कोई अनियमितता हो रही है, तो हमें इसकी सूचना दें। हम ऐसे मामलों को उजागर करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
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