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    Tuesday, January 28, 2025

    HP उच्च न्यायालय: अतिक्रमण मामले सुनने वाले अफसरों को पांच दिन का प्रशिक्षण दें।

     


    अतिक्रमण मामले में प्रदेश हाईकोर्ट की खंडपीठ के न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए।

    अतिक्रमण मामले में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट की खंडपीठ के न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए। खंडपीठ ने मुख्य सचिव को 28 फरवरी से पहले ट्रेनिंग से संबंधित सही निर्देश देने का आदेश दिया। 15 मार्च तक हलफनामा दें, जिसमें कोई अतिक्रमण नहीं होगा। भूमि अतिक्रमण मामलों की सुनवाई करने वाले अधिकारियों को न्यायिक अकादमी में पांच दिनों का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।अधिकारियों को प्रशिक्षण के दौरान कानूनी बारीकियों को सिखाया जाए। अदालत ने निर्णय दिया कि अधिकारियों को न्यायिक प्रक्रिया का ज्ञान नहीं होने से आम लोग न्याय नहीं पा रहे हैं।

    अधिकारियों नेकोर्ट में तथ्यों को सही तरीके से नहीं बताया। हाईकोर्ट ने पाया कि 163 औ सार्वजनिक परिसर भूमि बेदखली एवं किराया वसूली अधिनियम 1971 (पीपी एक्ट) की धारा 4 के नियमों को बहुत से मामलों की सुनवाई के दौरान अनदेखा किया जा रहा था। बेदखली और अतिक्रमण के आदेश पारित करते समय कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया जाता है।

    निर्देश देते समय विशेषज्ञता और कौशल का अभाव देखा गया है। न केवल न्याय में गड़बड़ी हो रही है, बल्कि सरकारी धन, राज्य के संसाधन और न्यायालयों की गरिमा को भी नुकसान हो रहा है। ऐसे आदेशों से लोगों का अनाधिकृत अधिग्रहण और सरकारी भूमि पर अतिक्रमण भी बढ़ रहा है। अदालत ने फॉरेस्ट डिविजन अधिकारी, सहायक कंजरवेटर फॉरेस्ट, डिविजन कमीश्नर और अन्य को प्रशिक्षण देने का आदेश दिया।

    अनुपालना में देरी होने पर अदालत को उचित कारण बताएं।

    30 दिसंबर 2024 को, हाईकोर्ट ने अतिरिक्त मुख्य सचिव राजस्व को आदेश दिया कि बेदखली और अतिक्रमण के सभी मामलों को सोच-समझकर और कानून की प्रक्रिया के तहत जल्द से जल्द निष्पादन दिया जाए। अनुपालना करने में देरी होने पर अदालत को उचित कारण बताएं। 2016 में राज्य सरकार ने सार्वजनिक परिसर, भूमि बेदखली और किराया वसूली अधिनियम 1971 (PPP Act) को लागू किया. पिछले दिसंबर में सुप्रीम कोर्ट ने अतिक्रमण से जुड़े लगभग 50 मामलों को वापस हाईकोर्ट भेजा। ऐसे मामले को फिर से सुनने का आदेश दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने इन मामलों की सुनवाई के दौरान तथ्यों को छोड़ दिया।इसके बावजूद भी नए मामले सामने नहीं आ रहे हैं।

    अतिक्रमण के लिए अधिकारी जिम्मेदार होंगे

    हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव, राजस्व, वन, जलशक्ति, पंचायती राज, गृह विभागों के प्रशासनिक सचिवों, बिजली बोर्ड के कार्यकारी निर्देशक और एनएचएआई के संबंधित अधिकारियों से कहा है कि वे सुनिश्चित करें कि भविष्य में ऐसे नए अतिक्रमण नहीं होंगे। अगर पूर्व अतिक्रमण के सिवाय किसी ने अतिक्रमण किया तो संबंधित अधिकारी जिम्मेदार होगा।

    मामले हल करने के लिए समय सीमा निर्धारित

    हाईकोर्ट ने लंबित मामलों को समय सीमा के भीतर हल करने के लिए वित्त आयुक्त, सहायक कलेक्टर प्रथम और द्वितीय श्रेणी को आदेश दिया है। अदालत के आदेशों का पालन करने के लिए समय सीमा ३१ जुलाई (कुछ मामलों में ३० जून), और कुछ मामलों में ३० मई (कुछ मामलों में ३१ मार्च २०२५) है।

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