मंगलवार को भगवान रघुनाथ जी की रथयात्रा के साथ अंतर्राष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव का आगाज हो गया। ढालपुर रथ मैदान के ठीक सामने पहाड़ी पर स्थित भेखली गांव में देवी जगन्नाथी भुवनेश्वरी अपने लाव-लश्कर के साथ निकलीं और ठीक शाम सवा 5 बजे पहाड़ी पर कारकूनों ने ध्वर फहराया। ध्वज का इशारा पाते ही रथ मैदान में अधिष्ठाता रघुनाथ जी का भव्य रथ आगे बढ़ा। कारकूनों ने जय श्रीराम के उद्घोष के साथ रथ को खींचा और जनसैलाब ने भी श्रीराम के जयकारे लगाए। रघुनाथ जी की रथयात्रा में हजारों लोग जुटे। कइयों ने रथ की डोर को स्पर्श करके पुण्य कमाया और कइयों ने दर्शन करके पुण्य अर्जित किया। रघुनाथ जी के साथ सैंकड़ों देवी-देवता चले और जनसैलाब भी आगे बढ़ता रहा। इससे पूर्व रघुनाथ जी को पालकी में रघुनाथ पुर से रथ मैदान तक लाया गया। उसके उपरांत रघुनाथ रथ में सवार हुए। रघुनाथ पुर से लेकर ढालपुर तक भी लोगों ने रघुनाथ जी के ऊपर पुष्प वर्षा की। इस मौके पर राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल सहित अन्य गण्यमान्य लोगों ने भी रथ यात्रा काे निहारा।
रथ यात्रा शुरू होने से पूर्व राज परिवार ने रथ की परिक्रमा की। परिक्रमा के उपरांत देवी का इशारा मिलते ही रथ यात्रा शुरू हुई। पूईद गांव में भी देवी का रथ निकला और देवलुओं ने रथ यात्रा की इजाजत के लिए ध्वज फहराया। रथ यात्रा कड़े सुरक्षा घेरे में हुई और इस यात्रा वाले रास्ते को रेखांकित किया गया। उसी पथ पर रघुनाथ आगे बढ़े। जिला भर से लोग इस भव्य देव समागम में जुटे और अन्य जिलों व प्रांतों से भी लोग पहुंंचे। कुल्लू पहुंचे विदेशी कलाकारों ने भी रथ यात्रा का आनंद उठाया और लोगों से पूरी जानकारी ली। रथ यात्रा से पूर्व रघुनाथ जी के छड़ीबरदार महेश्वर सिंह, कारदार दानवेंद्र सिंह, राज परिवार से हितेश्वर सिंह, आदित्य विक्रम सिंह सहित अन्य सदस्यों व देवलुओं ने रथ की परिक्रमा की। लोग रथ को रघुनाथ जी के अस्थायी शिविर तक लाए। उत्सव के अंतिम दिन 30 अक्तूबर को अस्थायी शिविर से रथ को कैटल मैदान ले जाएंगे। लंका दहन के उपरांत रथ में सवार होकर रघुनाथ सिया और लखन सहित रथ मैदान वापस पहुंचेंगे और फिर रघुनाथ पुर स्थित देवालय के लिए प्रस्थान करेंगे।
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