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गुशेनी स्कूल भवन जमींदोज: 600 बच्चों की पढ़ाई पर संकट, SDM ने संभाली कमान — निजी भवन में कल से लगेंगी कक्षाएं

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 16अक्तूबर।

परस राम भारती।

बंजार संवाददाता।

जिला कुल्लू की खूबसूरत तीर्थन घाटी इन दिनों एक गंभीर शैक्षणिक संकट से जूझ रही है। शिक्षा खंड बंजार के तहत आने वाला राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय गुशेनी प्राकृतिक आपदा की चपेट में आ गया है। पहाड़ी से लगातार हो रहे भूस्खलन और मलबा गिरने से विद्यालय का एक भवन पूरी तरह जमींदोज हो गया, जबकि दूसरा भवन ढहने के कगार पर खड़ा है। अब यह पूरा परिसर छात्रों और शिक्षकों के लिए असुरक्षित घोषित किया गया है।


करीब 600 विद्यार्थियों का भविष्य इस समय अधर में लटका हुआ है। अभिभावक बच्चों की सुरक्षा और पढ़ाई दोनों को लेकर गहरी चिंता में हैं। विद्यालय के पीछे स्थित कोशुनाली बंदल गांव की पहाड़ी से भारी मात्रा में गिरे पेड़-पत्थर और मलबे ने पूरे क्षेत्र को खतरनाक बना दिया है।

 स्कूल परिसर में अब जाना खतरे से खाली नहीं

स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश के मौसम में यह पहाड़ी लगातार खिसक रही है और कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। इस वजह से स्कूल प्रबंधन समिति ने भवन को पूरी तरह खाली करने का निर्णय लिया है।

विद्यालय की स्कूल मैनेजमेंट कमेटी (SMC) ने बच्चों की शिक्षा को सुचारु रखने के लिए वैकल्पिक भवन की तलाश शुरू कर दी थी। इसी के तहत बंजार प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अस्थाई व्यवस्था करने के आदेश दिए हैं।

SDM बंजार ने मौके पर पहुंचकर लिया जायजा

आज एसडीएम बंजार पंकज शर्मा स्वयं तीर्थन घाटी के केंद्र बिंदु गुशेनी पहुंचे और हालात का जायजा लिया। उनके साथ पंचायत प्रतिनिधि, स्कूल प्रबंधन समिति के सदस्य, शिक्षक और स्थानीय लोग मौजूद रहे।

बैठक के दौरान लोगों ने एसडीएम को विस्तार से अवगत कराया कि बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह से ठप पड़ी है और मानसून के बाद भवन का मलबा अभी भी खिसक रहा है।

एसडीएम पंकज शर्मा ने कहा —

 “हम किसी भी हाल में बच्चों की पढ़ाई को प्रभावित नहीं होने देंगे। जब तक स्थायी समाधान नहीं मिलता, तब तक वैकल्पिक व्यवस्था में कक्षाएं नियमित रूप से चलेंगी।”

उन्होंने शिक्षकों को निर्देश दिया कि प्राइमरी स्कूल गुशेनी और बाडीरोपा के निजी भवन में कल से नियमित कक्षाएं शुरू की जाएं।

9वीं से 12वीं की कक्षाएं निजी भवन में

प्रशासन की योजना के अनुसार, बाडीरोपा गांव के एक निजी भवन में फिलहाल 9वीं से 12वीं तक की कक्षाएं लगाई जाएंगी। एसडीएम ने बताया कि इस भवन में स्कूल संचालन की सरकारी अनुमति प्रक्रिया में है, और अनुमति मिलते ही 6वीं से 12वीं तक की कक्षाएं यहीं स्थानांतरित कर दी जाएंगी।

उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि विज्ञान संकाय के विद्यार्थियों के लिए छुट्टी के दिन एक्स्ट्रा क्लासेज आयोजित की जाएं ताकि पढ़ाई में कोई कमी न रहे।

SMC ने किया समाधान पर विचार

स्कूल प्रबंधन समिति की अध्यक्ष शिवा गौतम ने बताया कि गत माह हुई बैठक में बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। समिति ने तय किया कि नया भवन बनने तक अस्थायी भवन में पढ़ाई जारी रखी जाएगी और नए स्कूल भवन के निर्माण के लिए उपयुक्त स्थान भी चिन्हित किया गया है।

उन्होंने कहा —

 “स्कूल को हुए नुकसान की रिपोर्ट प्रशासन को भेजी गई है और नया भवन निर्माण जल्द शुरू हो, इसके लिए पत्राचार जारी है।”

 समाजसेवी संस्था ने बढ़ाया मदद का हाथ

शिक्षा संकट के बीच राहत की खबर यह रही कि क्रयाश चैरिटेबल ट्रस्ट सुंदरनगर की समाजसेवी संस्था ने विद्यालय में आकर बच्चों और शिक्षकों का मनोबल बढ़ाया। संस्था के संस्थापक धर्मेश शर्मा के नेतृत्व में टीम ने स्कूल परिसर में जागरूकता शिविर आयोजित किया।

इस दौरान विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी, स्वच्छता, नशामुक्ति, और किताब पढ़ने की आदत जैसे विषयों पर जागरूक किया गया।

संस्था की ओर से विद्यालय को सहयोग के रूप में दिया गया:

200 मेट्रेस

1 प्रिंटर

38 किताबें

2 वाटर फिल्टर

6 ब्लैकबोर्ड

5 चौक बॉक्स

6 डस्टर

20 रेनकोट

धर्मेश शर्मा ने कहा —

 “हमारी संस्था शिक्षा, स्वच्छता और पर्यावरण के क्षेत्र में सक्रिय है। हमारा प्रयास रहेगा कि गुशेनी के बच्चों की पढ़ाई किसी भी हालत में प्रभावित न हो।”

स्थायी भवन निर्माण की राह अभी लंबी

हालांकि वैकल्पिक व्यवस्था से फिलहाल राहत जरूर मिली है, लेकिन स्थायी समाधान अभी दूर है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को जल्द से जल्द नए सुरक्षित भवन का निर्माण शुरू करना चाहिए ताकि बच्चों को फिर से अस्थायी भवनों के सहारे न रहना पड़े।

लोगों ने यह भी मांग की है कि भूस्खलन प्रभावित इलाके में सुरक्षा दीवारें (रिटेनिंग वॉल) और ड्रेन सिस्टम बनाकर भविष्य में ऐसी स्थिति से बचाव किया जाए।

अभिभावकों की अपील

गुशेनी क्षेत्र के अभिभावकों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों से यह क्षेत्र लगातार भूस्खलन की चपेट में है। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।

 निष्कर्ष

गुशेनी का यह मामला सिर्फ एक स्कूल का नहीं, बल्कि पहाड़ी इलाकों में शिक्षा की जमीनी चुनौतियों का आईना है। जहां एक ओर प्रकृति की मार है, वहीं दूसरी ओर सरकारी प्रक्रिया की सुस्ती बच्चों के भविष्य को दांव पर लगा रही है।

प्रशासन ने भले ही वैकल्पिक कक्षाओं की

 शुरुआत की हो, लेकिन असली राहत तब मिलेगी जब बच्चे अपने नए, सुरक्षित भवन में वापस लौटेंगे और पढ़ाई फिर से पटरी पर आएगी।

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