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केंद्र सरकार की हिमाचल को बड़ी सौगात: दो नए केंद्रीय विद्यालय और जीएसटी में राहत से हथकरघा क्षेत्र को बढ़ावा

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 हिमाचल प्रदेश को केंद्र सरकार से बड़ी सौगात मिली है। शिमला संसदीय क्षेत्र के कोटखाई और पांवटा साहिब विधानसभा क्षेत्रों में दो नए केंद्रीय विद्यालय (केवी) खोलने को मंजूरी दी गई है। इस ऐतिहासिक घोषणा पर भाजपा पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद सुरेश कश्यप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का हार्दिक आभार व्यक्त किया।


सुरेश कश्यप ने कहा कि देश भर में केंद्रीय कर्मचारियों के बच्चों की बढ़ती संख्या को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति ने 57 नए केंद्रीय विद्यालय खोलने की मंजूरी दी है। इन 57 केंद्रीय विद्यालयों की कुल अनुमानित लागत लगभग 5862.55 करोड़ रुपये है, जिसमें 2585.52 करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय और 3277.03 करोड़ रुपये का परिचालन व्यय शामिल है। इन विद्यालयों में पहली बार प्री-प्राइमरी (बाल वाटिका) के तीन वर्ष भी शामिल किए गए हैं।


सुरेश कश्यप ने बताया कि नवीनतम जीएसटी सुधारों से हिमाचल प्रदेश के पारंपरिक हथकरघा उद्योग को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। राज्य के प्रसिद्ध शॉल और ऊनी वस्त्रों के उत्पादन में लगे हजारों कारीगरों को राहत मिलने वाली है। कुल्लू घाटी में 3,000 से अधिक बुनकर जीआई-टैग वाले कुल्लू शॉल बनाते हैं, जबकि किन्नौर जिले के शॉल जटिल पारंपरिक डिज़ाइनों के लिए जाने जाते हैं। जीएसटी दरों में कटौती से इन उत्पादों की लागत कम होने और उपभोक्ताओं तक सस्ती कीमत पर पहुंचने की संभावना है।


इसके अलावा पश्मीना शॉल पर भी जीएसटी दर 12% से घटाकर 5% कर दी गई है, जिससे हिमाचल के लाहौल-स्पीति, किन्नौर, कुल्लू, मंडी और शिमला जैसे क्षेत्रों में बनाए जाने वाले ऊनी शिल्प को लाभ मिलेगा। हिमाचल की पारंपरिक टोपियाँ और दस्ताने भी नए जीएसटी स्लैब से लाभान्वित होंगे। इससे न केवल कारीगरों की आय बढ़ेगी बल्कि पीढ़ियों पुरानी हस्तशिल्प परंपरा भी सुरक्षित रहेगी।


सुरेश कश्यप ने कहा, "प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में ये निर्णय न केवल शिक्षा और हथकरघा क्षेत्र में प्रगति का अवसर देंगे, बल्कि हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था और कारीगरों की आजीविका को भी मजबूती प्रदान करेंगे।"


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