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सरकारी स्कूल बंद करने के फैसले पर भड़की SFI, रामपुर में प्रदर्शन

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 स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) रामपुर इकाई ने मंगलवार को नए बस स्टैंड में जोरदार प्रदर्शन कर सरकार की नई शिक्षा नीति (NEP 2020) और सरकारी स्कूलों को बंद करने के फैसले का विरोध किया। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ शामिल हुए और शिक्षा को बचाने के नारे लगाए।



शिक्षा केवल अमीरों के लिए नहीं: SFI

रामपुर इकाई की अध्यक्ष पूजा ने कहा कि भारत जैसे विशाल देश में शिक्षा केवल कुछ विशेषाधिकार प्राप्त वर्गों के लिए नहीं, बल्कि हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि आज़ादी के बाद से मेहनतकश तबकों के लिए शिक्षा का आधार सरकारी स्कूल और कॉलेज रहे हैं, लेकिन अब सरकार सुनियोजित तरीके से इन्हें बंद कर शिक्षा को निजी हाथों में सौंप रही है। यह कदम न केवल गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चों के अधिकारों पर हमला है बल्कि पूरे लोकतांत्रिक ढांचे पर आघात है।


पूजा ने कहा कि सरकारी स्कूलों की बंदी का सीधा असर ग्रामीण इलाकों और मज़दूर-किसान परिवारों पर पड़ रहा है। निजी स्कूलों की ऊंची फीस पहले ही परिवारों को परेशान कर रही है। ऐसे में सरकारी स्कूल बंद करना गरीब बच्चों को शिक्षा से वंचित करने और छात्राओं व पिछड़े वर्ग के बच्चों को और पीछे धकेलने जैसा है।


NEP – निजीकरण और सांप्रदायिकीकरण का रास्ता

संगठन की सचिव ने कहा कि NEP शिक्षा को लोकतांत्रिक और वैज्ञानिक आधार से हटाकर निजीकरण और असमानता की ओर ले जाती है। NEP लागू होने से स्कूल-कॉलेजों में फीस लगातार बढ़ रही है और यह शिक्षा को आम छात्र की पहुंच से बाहर कर रही है।


उन्होंने आरोप लगाया कि ‘स्कूल समेकन नीति’ के नाम पर छोटे सरकारी स्कूलों को बंद किया जा रहा है। पाठ्यक्रम से वैज्ञानिक और प्रगतिशील विषयों को हटाकर सांप्रदायिक सामग्री जोड़ी जा रही है, जबकि मातृभाषा और स्थानीय भाषाओं को नज़रअंदाज़ कर शिक्षा को कुछ खास वर्गों तक सीमित किया जा रहा है। साथ ही, कॉन्ट्रैक्ट और अस्थायी नियुक्तियों से शिक्षकों को भी असुरक्षा की स्थिति में डाल दिया गया है।

SFI की माँगें

प्रदर्शन के दौरान SFI ने स्पष्ट किया कि शिक्षा व्यापार नहीं बल्कि हर बच्चे का लोकतांत्रिक अधिकार है। संगठन ने सरकार से मांग की कि –

सरकारी स्कूलों को बंद करने का निर्णय तुरंत वापस लिया जाए।

नई शिक्षा नीति (NEP 2020) को रद्द किया जाए।

शिक्षा पर जीडीपी का 6% खर्च किया जाए।

सरकारी स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों की संरचना मज़बूत की जाए।

छात्रों से वसूली जा रही मनमानी फीस पर रोक लगे।

सभी बच्चों के लिए मुफ्त, समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित की जाए।

शिक्षकों की नियमित नियुक्ति की जाए और कॉन्ट्रैक्ट प्रणाली खत्म की जाए।


आंदोलन होगा तेज

SFI ने ऐलान किया कि यदि सरकार ने शिक्षा पर हमला जारी रखा तो संघर्ष और तेज़ होगा। संगठन ने कहा कि आने वाले दिनों में गाँव-गाँव, शहर-शहर रैलियाँ, पैदल मार्च और विरोध सभाएँ आयोजित की जाएँगी और छात्रों, शिक्षकों, अभिभावकों व समाज के अन्य वर्गों को जोड़कर आंदोलन को मज़बूत किया जाएगा।

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