हिमाचल प्रदेश की विश्व धरोहर ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क की गोद में बसे तीर्थन घाटी में दो दिवसीय तीर्थन नदी महोत्सव का सोमवार को भव्य समापन हुआ। महोत्सव का आयोजन ग्राम पंचायत कलवारी के देहुरी स्थान पर साते देहुरी जाच पर्व के उपलक्ष्य में किया गया।
रविवार को पूर्व विधायक स्व. दिले राम शबाब के पुत्र रंजीव भारती ने तीर्थन ध्वजारोहण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
नदी संरक्षण पर कार्यशाला
दो दिन तक चली इस कार्यशाला में “तीर्थन घाटी की स्थिरता और तीर्थन नदी का संरक्षण” विषय पर गहन चर्चा हुई। विशेषज्ञों, स्थानीय लोगों और विभिन्न संगठनों ने घाटी के सतत विकास, प्रदूषण नियंत्रण और पर्यटन के संतुलित स्वरूप को लेकर सुझाव रखे।
सांस्कृतिक कार्यक्रम और प्रतियोगिताएं
महोत्सव के दौरान नाटी प्रतियोगिता, समूह गान, महिला खेल, पेंटिंग, प्रश्नोत्तरी और प्रदर्शनी का आयोजन हुआ। सहारा कला जत्था, उभरते लोक कलाकार और गायकों ने लोकगीतों व प्रस्तुतियों के जरिए पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। विजेताओं को पंचायत समिति चेयरमैन लता देवी ने पुरस्कृत किया।
नदी पूजा और शपथ
सोमवार को लोगों ने पारंपरिक वेशभूषा में ढ़ोल-नगाड़ों की थाप पर तीर्थन नदी की पूजा-अर्चना की और संकल्प लिया कि नदी को स्वच्छ व प्रदूषणमुक्त बनाए रखेंगे। लोगों ने प्रतिज्ञा ली—
“हम तीर्थन नदी को माता समान मानते हुए इसके संरक्षण, रखरखाव और स्वच्छता के लिए सदैव वचनबद्ध रहेंगे।
देव मिलन बना आकर्षण
महोत्सव के अंतिम दिन साते देहुरी जाच मेले में लोमश ऋषि (पेखड़ी) और लक्ष्मी नारायण देवता (कलवारी) की हाजिरी रही। देवताओं का यह भव्य मिलन मेले का मुख्य आकर्षण रहा। सैकड़ों श्रद्धालुओं ने इस मौके पर पारंपरिक नाटी का आनंद उठाया।
आयोजकों का कहना
सहारा संस्था के निदेशक राजेन्द्र चौहान ने बताया कि महोत्सव का उद्देश्य नई पीढ़ी में संस्कृति और प्रकृति के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। इस आयोजन को आदर्श महिला मंडल देहुरी, सहारा संस्था, PHD संस्था, तीर्थन कंजर्वेशन एवं टूरिज़्म डेवलपमेंट एसोसिएशन, जिभी वैली टूरिज़्म डेवलपमेंट एसोसिएशन और अन्य स्थानीय संगठनों ने मिलकर सफल बनाया।
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