हिमाचल में शुरू हुई “पशु मित्र नीति”, ग्रामीण युवाओं को मिलेगा रोज़गार और पशु कल्याण को बढ़ावा - अखण्ड भारत दर्पण (ABD) न्यूज़

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    Saturday, August 23, 2025

    हिमाचल में शुरू हुई “पशु मित्र नीति”, ग्रामीण युवाओं को मिलेगा रोज़गार और पशु कल्याण को बढ़ावा



    डी० पी० रावत ऑनलाइन डैस्क ब्यूरो।,

    शिमला/कुल्लू, 23 अगस्त।
    हिमाचल प्रदेश सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में पशुओं की देखभाल, संरक्षण और स्वास्थ्य सेवाओं को मज़बूती देने के लिए “पशु मित्र नीति-2025” को लागू कर दिया है। इस योजना के तहत प्रदेशभर में मल्टी टास्क वर्कर्स (Animal Husbandry) को अब “पशु मित्र” के नाम से जाना जाएगा।

    सरकार की अधिसूचना के अनुसार, प्रत्येक चयनित पशु मित्र को प्रतिमाह ₹5000 का मानदेय दिया जाएगा। उन्हें प्रतिदिन 4 घंटे कार्य करना होगा।

    🔹 पशु मित्र की प्रमुख जिम्मेदारियां

    • बीमार व नवजात पशुओं की देखभाल एवं चिकित्सक की मदद।
    • टीकाकरण, इलाज और कृत्रिम गर्भाधान में सहयोग।
    • पशु आश्रय स्थल, गोशालाओं व डिस्पेंसरी की साफ-सफाई।
    • चारे, पानी व दवाइयों का प्रबंधन।
    • मृत पशुओं का अंतिम निपटारा।
    • भेड़-बकरी, मुर्गी पालन व पशु प्रजनन केंद्रों में सहयोग।
    • प्रयोगशालाओं में नमूनों और उपकरणों की सफाई।

    🔹 पात्रता और चयन प्रक्रिया

    • अभ्यर्थी हिमाचल प्रदेश का स्थायी निवासी होना चाहिए।
    • न्यूनतम शैक्षिक योग्यता: मैट्रिक (10वीं पास)
    • आयु सीमा: 18 से 45 वर्ष
    • शारीरिक रूप से फिट होना अनिवार्य।
    • चयन प्रक्रिया में शारीरिक परीक्षा + मेरिट लिस्ट के आधार पर उम्मीदवार चुने जाएंगे।
    • वरीयता उन अभ्यर्थियों को दी जाएगी जिनके परिवार के पास पशुपालन का अनुभव हो, या जो SC/ST/OBC, BPL/EWS, विधवा/एकल महिला, अनाथ/अकेली पुत्री जैसी श्रेणियों से आते हों।

    🔹 सेवा शर्तें

    • चयनित पशु मित्र को छुट्टियों का भी प्रावधान होगा – एक महीने की सेवा पर 1 दिन का अवकाश, अधिकतम 12 दिन सालाना।
    • महिला पशु मित्रों को मातृत्व अवकाश का लाभ मिलेगा।
    • कार्य में लापरवाही या अनुशासनहीनता पर सेवाएं समाप्त की जा सकेंगी।
    • नियुक्ति गैर-स्थानांतरणीय होगी और इसे नियमित सरकारी नौकरी का दावा नहीं माना जाएगा।

    🔹 सरकार का उद्देश्य

    पशु मित्र नीति का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन को बढ़ावा देना, पशुओं की देखभाल सुनिश्चित करना और युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोज़गार देना है।
    विशेषज्ञों का मानना है कि इस योजना से न केवल पशुओं की बेहतर सुरक्षा होगी बल्कि किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।

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