राजधानी शिमला के इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (IGMC) में एक बार फिर स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। एक महिला की मौत के बाद उसके परिजनों ने अस्पताल प्रशासन और इमरजेंसी वार्ड में तैनात डॉक्टरों पर इलाज में गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं।
परिजनों का आरोप है कि मरीज को समय पर इलाज नहीं मिला, जिस कारण उसकी जान चली गई। मृतका के बेटे ने बताया कि “मैं, मेरा भाई, बहन और पत्नी करीब एक घंटे तक इमरजेंसी वार्ड में डॉक्टरों से गुहार लगाते रहे, लेकिन किसी ने सुनवाई नहीं की। डॉक्टर सामने से निकलते रहे और हम इलाज के लिए इधर-उधर भटकते रहे।”
उन्होंने बताया कि जब उन्होंने पूरी घटना का वीडियो बनाना शुरू किया, तब जाकर डॉक्टर हरकत में आए और इलाज शुरू किया गया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी।
परिजनों ने यह भी बताया कि महिला को IGMC में भर्ती कर लिया गया था, लेकिन उसकी गंभीर हालत को देखते हुए तत्काल चिकित्सा की जरूरत थी, जो नहीं दी गई। इस दौरान एक सिख डॉक्टर ने मानवीयता दिखाते हुए उपचार में मदद की, पर तब तक स्थिति बिगड़ चुकी थी।
प्रशासन ने कहा—शिकायत मिलने पर होगी जांच
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए IGMC के डिप्टी मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. अमन ने कहा, “अब तक हमारे संज्ञान में ऐसा कोई मामला नहीं आया है। यदि इस संबंध में शिकायत मिलती है तो उचित जांच की जाएगी।”
फिलहाल परिजनों की पीड़ा और आरोप स्वास्थ्य व्यवस्था की खामियों की ओर इशारा कर रहे हैं। यह देखना अहम होगा कि अस्पताल प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और दोषियों के खिलाफ कोई कार्रवाई होती है या नहीं।
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