5 जुलाई।
Cauliflower also gets 'thorns of inflation', 25 to 30 rupees per kg. Cauliflower sold reaches Rs 100
हमीरपुर में इस बार महंगाई के सारे रिकॉर्ड तोड़ते हुए फूलगोभी का मूल्य सब्जियों में सबसे अधिक होगा, ऐसा कभी नहीं सोचा गया था। फूलगोभी की कीमत ने इस बार कई वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ा है। वर्तमान परिस्थितियों में एक साहसी दुकानदार ही फूलगोभी अपनी दुकान में रखने का विचार करेगा। हमीरपुर में भी यही स्थिति है; कुछ सब्जी विक्रेताओं के पास गोभी है, जबकि अन्य ने इसे रखने से इनकार कर दिया है। इसका मुख्य कारण मूल्य का अचानक बढ़ना है। 25 से 30 रुपए प्रति किलोग्राम बिकने वाली फूलगोभी आज 100 रुपए प्रति किलोग्राम बिकती है। फूलगोभी और टमाटर की कीमतें कम नहीं हुई हैं। टमाटर फिलहाल 120 रुपए प्रति किलोग्राम बिक रहा है।
टमाटर की कीमतें बढ़ने से दुकानदारों ने भी थोक में रखना छोड़ दिया है। टमाटर सिर्फ कुछ दुकानदारों के पास है। अन्य सब्जियों की कीमतें भी बढ़ गई हैं। खीरा 40 रुपए/किलोग्राम, घिया 50 रुपए/किलोग्राम, भिंडी 60 रुपए/किलोग्राम, अरबी 60 रुपए/किलोग्राम, शिमला मिर्च 80 रुपए/किलोग्राम, गोभी 100रुपए/किलोग्राम, मटर 80 रुपए/किलोग्राम, टमाटर 120 रुपए/किलोग्राम, मीटरफली 80 रुपए/किलोग्राम, आलू 25 रुपए/किलोग्राम।
लाहुली ब्रोकली दिल्ली में 250 रुपए प्रति किलो पतलीकूहल—पिछले एक सप्ताह से जिले के सब्जी उत्पादकों को दिल्ली और देश भर की अन्य मंडियों में ब्रोकली और आइस वर्ग के बेहतरीन दाम मिल रहे हैं। दिल्ली में मनाली की ब्रोकली 180 रुपए प्रति किलो है, जबकि लाहुल की 200 से 250 रुपए प्रति किलो है। हालाँकि घाटी में मई से जून तक ब्रोकली 25 से 60 रुपए प्रति किलो बिकी, अब इसकी कीमतें बढ़ गई हैं। सब्जी उत्पादकों का कहना है कि एक सप्ताह से मूल्यों में वृद्धि हुई है।
यूनिवर्सल कार्टन को लागू करने के लिए शिमला सेब बागवानों ने गुरुवार को सड़कों पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन एसडीएम और तहसीलदार स्तर पर हुआ। इस दौरान, बागबानों ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू को ज्ञापन भेजे, जिसमें सरकार के समक्ष मांगें उठाई गईं। ठियोग, शिमला, रामपुर, कुमारसैन, आनी, कोटखाई, रोहड़ू और अन्य स्थानों पर प्रदर्शन हुआ। प्रमुख मांगों में सेब की पैकिंग के लिए यूनिवर्सल कार्टन को अनिवार्य करना, एपीएमसी लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट और पैसेंजर एंड गुड्स टैक्स एक्ट को सख्ती से लागू करना और आढ़ती और सरकार को बागवानों की बकाया राशि का जल्द भुगतान करना शामिल है। बागवान 24 किलो सेब पैकिंग की शर्त को भी नहीं मानते हैं।
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