"चलो गांव की ओर" संकल्प के साथ कार्य करें अधिकारी ।
कृषि मंत्री ने सभी विभागों को अपनी गतिविधिओं को बेहतर तालमेल और आपसी सहयोग से ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाने के लिए "चलो गांव की ओर" संकल्प के साथ आगे बढ़ाने पर बल दिया है। उन्होंने अधिकारियों को ग्रामीण क्षेत्रों में खेतीबाड़ी के अलावा बागवानी, डेयरी फार्मिंग, पुष्प उत्पादन जैसी अन्य गतिविधियों को बढ़ाने के लिए महिलाओं के समूहों को जोड़ने के भी निर्देश दिए।
कृषि मंत्री ने प्राकृतिक उत्पादों की बढ़ती मांग को देखते हुए किसानों को खेती के ढांचे को बदलने के साथ नकदी फसलों के उत्पादन तथा प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के दृष्टिगत विभाग द्वारा क्लस्टर सिस्टम की शुरुआत की जाएगी। उन्होंने हर क्षेत्र की मिट्टी की विशेषताओं का आकलन करने के लिए मृदा परीक्षण करने के भी कृषि अधिकारियों को निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों-बागवानों और पशुपालकों की आय को बढ़ाने के साथ उनकी आर्थिकी को सुदृढ़ बनाने के लिए कृतसंकल्प है। लेकिन इसके लिये सभी विभागों को आपसी तालमेल से कार्य करने की आवश्यकता है।
प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र, भरमाड़ का किया शुभारम्भ......
किसानों को एक छत के नीचे मिलेगी सभी सुविधाएं।
कृषि मंत्री ने भरमाड़ में इफको द्वारा नवनिर्मित प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र की सौगात किसानों को देते हुए कहा कि इसके खुलने से किसानों को एक ही छत के नीचे इफको के खेतीबाड़ी से संबंधित सभी उत्पाद जैसे नवीनतम उर्वरक,
कीटनाशक, स्प्रे पंप आदि बाज़ार से कम दामों पर उपलब्ध होंगे। इसके अतिरिक्त किसानों को इसी प्रांगण में मिट्टी के नमूनें जांच के लिए जमा करवाने की भी सुविधा उपलब्ध रहेगी।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में कृषि तथा बागवानी में रसायनिक खादों तथा कीटनाशकों के बढ़ते प्रयोग से मुक्ति दिलाने के लिए प्राकृतिक खेती पर बल दिया जा रहा है I जिस बारे कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर तथा कृषि विभाग द्वारा किसानों को समय-समय पर तकनीकी जानकारी उपलब्ध करवाने के साथ-साथ प्रशिक्षण प्रदान कर इस विधि को अपनाने के लिये प्रेरित किया जा रहा है।
उन्होंने कृषि अधिकारियों से कहा कि वे प्राकृतिक खेती को अपनाने के लिये अधिक से अधिक लोगों को जागरूक व प्रेरित करें। उन्होंने अधिकारियों से कृषि योजनाओं को धरातल पर उतारने का आह्वान किया, ताकि किसानों को कृषि तकनीकों बारे सही व उपयोगी जानकारी घर- द्वार के समीप मिल सके।
इफको के राज्य विपणन प्रबंधक डॉ भुवनेश पठानिया ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि किसानों को पारंपरिक यूरिया खाद से निजात दिलाने के लिए इफको द्वारा विश्व प्रथम निर्मित नैनो यूरिया तरल विकल्प को इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि नैनो यूरिया तरल पारंपरिक यूरिया की तुलना में जहां पर्यावरण हितेषी उत्पाद हैं वहीं बोरी वाले यूरिया से सस्ता भी है।
उन्होंने कहा कि उर्वरकों के निर्माण तथा अनुदान पर भारत सरकार की भरकम राशि खर्च हो रही है। नैनो यूरिया अनुदान के भरकम बोझ से मुक्ति दिलाने में एक बहुमूल्य भूमिका प्रदान करेगी।
इस मौके पर नैनो यूरिया को सीमांत किसानों तक पहुंचाने के लिए इफको द्वारा सहकारी समितियों को निशुल्क स्प्रे पंप भी प्रदान किये गए। इसके अतिरिक्त सभी प्रतिभागी सीमांत किसानों को नैनो यूरिया तथा सामाजिक कल्याण हेतु 80 गरीब परिवारों को कम्बल भी प्रदान किये गए।
इस मौके पर कृषि उपनिदेशक राहुल कटोच सहित कृषि विज्ञान केंद्र कांगड़ा के वैज्ञानिक डॉ संजय शर्मा तथा डॉ दीप कुमार ने भी किसानों को खेती के कई विषयों पर महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदान कीं।
ये रहे मौजूद
कृषि विज्ञान केंद्र कांगड़ा के प्रभारी एवं मृदा वैज्ञानिक डॉ संजय शर्मा, सस्य वैज्ञानिक डॉ दीप कुमार, उप मंडलीय भू संरक्षण अधिकारी राकेश पटियाल, स्थानीय पंचायत प्रधान सुशील कुमार, भरमाड़ कृषि सहकारी सभा के प्रधान राम लुभाया, उपप्रधान साधु राम तथा सचिव हरदेव सिंह, बड़ी संख्या में किसान, विभागों के अधिकारी व अन्य गण्यमान्य लोग उपस्थित रहे।
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