विधानसभा में महिला विधायकों की संख्या को लेकर विवाद, “तथ्यहीन और हास्यास्पद” बताया बयान
शिमला, 18 अप्रैल
अखण्ड भारत दर्पण (एबीडी )न्यूज
हिमाचल प्रदेश में महिला आरक्षण और महिला सशक्तिकरण को लेकर राजनीतिक माहौल गर्माता जा रहा है। मंडी संसदीय क्षेत्र से भाजपा सांसद कंगना रनौत के संसद में दिए एक बयान ने प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। संसद में अपने संबोधन के दौरान कंगना रनौत ने कहा कि हिमाचल प्रदेश विधानसभा में 68 विधायकों में से केवल एक ही महिला विधायक है। उनके इस बयान के सामने आते ही राजनीतिक हलकों के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी बहस छिड़ गई और कई लोगों ने इसे तथ्यात्मक रूप से गलत बताते हुए आलोचना की।
इस मुद्दे पर प्रदेश के लोकनिर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कंगना के बयान को पूरी तरह तथ्यहीन और हास्यास्पद करार देते हुए कहा कि वर्तमान में हिमाचल विधानसभा में तीन महिला विधायक हैं, जिनमें एक भाजपा और दो कांग्रेस से संबंधित हैं।
विक्रमादित्य सिंह ने तंज कसते हुए कहा कि जिन्हें प्रदेश की बुनियादी राजनीतिक जानकारी तक नहीं है, वे महिला सशक्तिकरण जैसे गंभीर विषय पर बयान दे रही हैं, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि इस तरह के गलत बयानों से जनता के बीच भ्रम फैलता है और लोकतांत्रिक विमर्श की गंभीरता कम होती है।
महिला आरक्षण बिल पर भी उठाए सवाल
विवाद यहीं नहीं थमा। विक्रमादित्य सिंह ने महिला आरक्षण बिल को लेकर केंद्र सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी लंबे समय से महिला आरक्षण की समर्थक रही है, लेकिन भाजपा इसे केवल राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल कर रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि जब देश के कई राज्यों में विधानसभा चुनाव का माहौल था, उसी दौरान महिला आरक्षण बिल को संसद में लाया गया। उनके अनुसार, वर्ष 2023 में प्रस्तुत इस बिल को जिस तरीके से पेश और पारित किया गया, वह पूरी तरह से राजनीतिक रणनीति का हिस्सा था।
विक्रमादित्य ने कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे को चुनावी फायदे के लिए इस्तेमाल करना उचित नहीं है। उन्होंने भाजपा पर महिलाओं के नाम पर राजनीति करने का भी आरोप लगाया।
बढ़ी सियासी बयानबाजी, आगे और तेज होने के आसार
कंगना रनौत के बयान के बाद हिमाचल प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा जहां महिला सशक्तिकरण को लेकर अपनी प्रतिबद्धता जाहिर कर रही है, वहीं कांग्रेस इसे राजनीतिक एजेंडा बताकर सरकार को घेर रही है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले समय में यह मुद्दा और अधिक तूल पकड़ सकता है, खासकर जब महिला आरक्षण और सशक्तिकरण जैसे विषय जनभावनाओं से जुड़े हों। ऐसे में प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी रहने की पूरी संभावना है।

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